खराब मौसम में भी खूब पैदावार
- रबी सीजन 2025-26 में जिले में सबसे ज्यादा गेहूं के बीज का उत्पादन हुआ है। डीबीडब्ल्यू-187, एचडी-2967 और पीबीडब्ल्यू-372 जैसी उन्नत किस्मों ने खराब मौसम में भी अच्छी पैदावार दी। कई किसानों को प्रति हेक्टेयर करीब 50 क्विंटल तक उपज मिली।
- आलू की कुफरी सूर्या, कुफरी बाहर और कुफरी ख्याति जैसी किस्मों ने भी किसानों को बेहतर मुनाफा दिया है। कुफरी ख्याति ने 350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देकर किसानों का भरोसा मजबूत किया है।
- धान में पूसा बासमती-1692, 1718 और 1509 जैसी किस्मों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इन बीजों की सप्लाई बिहार, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश और दिल्ली तक हो रही है।
- मूंग की पूसा सम्राट, मसूर एलएस-4037 और पूसा अरहर-16 जैसी दालों की किस्में भी किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही हैं।
नौकरी छोड़ी, आलू के बीज बना रहे
- धुर्रा प्रेमनगर निवासी राहुल ने चार साल पहले नौकरी छोड़कर आलू के बीज उत्पादन का काम शुरू किया। इस बार उन्होंने 80 बीघा क्षेत्र में टी-7, टी-9, कुफरी सूर्या और कुफरी चिप्सोना की खेती की है। राहुल बताते हैं कि सामान्य आलू की तुलना में बीज वाले आलू का भाव कई गुना अधिक मिलता है। जहां साधारण आलू 600 से 700 रुपये प्रति 50 किलो बिकता है, वहीं बीज वाला आलू 1000 से 2500 रुपये तक पहुंच जाता है।
- गांव सिहोर निवासी केमिकल इंजीनियर एके शर्मा भी गेहूं और बासमती के बीज उत्पादन से जुड़े हैं। उनके साथ करीब 25 किसान काम कर रहे हैं। शर्मा बताते हैं कि बीज उत्पादन में तकनीक और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखना पड़ता है, लेकिन मुनाफा भी सामान्य खेती से बेहतर मिलता है।