कलेक्ट्रेट रिकार्ड रूम में एक बाबू ने आगरा कमिश्नरी से आई एक फाइल और उसकी रिसीविंग का रजिस्टर नौ साल तक दबाए रखा। जिससे जमीन के मालिकों को इस फाइल के लिए दर-दर भटकना पड़ा। रिकार्ड रूम के बाबुओं की मनमानी का आलम ये है कि इस फाइल दबाऊ बाबू ने रिटायर होने पर जिस समकक्ष बाबू को आधिकारिक तौर पर सभी कागजात रिसीव कराए। उस रिसीव करने वाले बाबू ने कह दिया है कि रिसीविंग में उसके साइन नहीं हैं। फिलहाल इस मामले में नौ साल रिकार्ड दबाए रखने बाबू के खिलाफ पुलिस एफआईआर कराने की तैयारी हो रही है।
इस मामले में पीड़ित राजीव वार्ष्णेय ने बताया कि वर्ष 1996 में उन्होंने अतरौली के अवंतीबाई चौराहे के पास शेर मोम्महद से पौने छह बीघा जमीनी खरीदी थी। जिसका बैनामा उनकी पत्नी विनीता और भाई सुधीर के नाम से हुआ था। इस जमीन का दाखिल खारिज कराने के लिए उन्होंने उसी वक्त प्रयास शुरू कर दिया। जिसमें तहसील से बैनामा में स्टांप शुल्क कम होने की आपत्ति लगा कर दाखिल खारिज रोक दिया गया। इसके बाद राजीव इस मामले में पैरवी करते-करते रेवेन्यू बोर्ड इलाहाबाद तक पहुंच गए। इलाहाबाद में सुनवाई के बाद मामला तत्कालीन आगरा कमिश्नरी में भेजा गया, क्योंकि उस वक्त (वर्ष 2008 तक) अलीगढ़ कमिश्नरी नहीं थी, अलीगढ़ आगरा कमिश्नरी में निहित था। आगरा कमिश्नर ने मामले में अपना फैसला सुनाकर पूरी फाइल अलीगढ़ कलेक्ट्रेट भेज दी। अलीगढ़ आने के बाद वर्ष 2010 से 2019 तक रिकार्ड रूम में तैनात एक बाबू इस फाइल को दबाए रहा।
ये बाबू जब वर्ष 2019 में रिटायर हुआ, तो उसने दूसरे समकक्ष बाबू को ये फाइल सौंप कर रजिस्टर में रिसीविंग साइन कराए, लेकिन रिसीविंग लेने वाले बाबू ने अब ये कह कर पूरा मामला पलट दिया कि रिसीविंग में उसके साइन नहीं हैं। जिससे अभी तक इस मामले में राजीव को न्याय नहीं मिल सका है। अपनी ही जमीन के कागज के लिए आगरा से अलीगढ़ तक भटकते रहे राजीव ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम में पूर्व में इलाहाबाद से आगरा तक पैरवी करने वाले उनके चाचा और वकील का इस बीच निधन हो गया था। इसलिए कागजों की जानकारी उन्हें नहीं मिल सकी। थकहार कर उन्होंने पीएम मोदी, सीएम योगी को ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत करने के साथ इस मामले में आरटीआई लगाई। आरटीआई के बाद अधिकारियों ने इसकी सुधि ली। जांच पड़ताल हुई तो पता चला कि कलक्ट्रेट रिकार्ड रूम का बाबू ही नौ साल से आगरा से आई फाइल दबाए बैठा था। पूरा वाकया जानने के बाद गुस्साए डीएम ने नौ साल तक रिकार्ड दबाए रखने वाले उक्त बाबू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करा दी है। रिकार्ड रूम की एक बाबू इस संबंध में आरोपी बाबू के खिलाफ तहरीर दे रही हैं।