आवास योजनाएं दलालों से मुक्त नहीं हो पा रहीं। गत वर्ष एलमपुर आवास योजना की पड़ताल की तो उसमें जेई तक फर्जी निकला था। दलालों ने भ्रष्टाचार की सारी हदें पार की थीं। कुछ ऐसे ही संकेत प्रधानमंत्री आवास योजना के ढाई लाख रुपयों के आवंटन में मिल रहे हैं। इस योजना में भी वैसे ही लोगों की उपस्थिति के संकेत मिले हैं। इसे लेकर युवा भाजपा नेता डॉ. निशित शर्मा ने सवाल उठाए हैं। आरटीआई के तहत सवाल पूछते हुए कहा है कि किस किसको और कैसे बांटे ढाई लाख? आरटीआई के माध्यम से डूडा से भी पूछा गया है।
आरटीआई युवा भाजपा नेता व पूर्व जिला प्रवक्ता डॉ. निशित शर्मा ने डाली है। डीपीआर के 5 हजार नाम ढाई हजार लाभार्थियों में तब्दील हुए। इसी तरह तीसरे दौर की प्रक्रिया तक कई और नामों को लाभ मिला। प्लाट पर जिओ टैगिंग व्यवस्था सवालों के घेरे में बताई जा रही है। पूरी प्रक्रिया को लेकर डॉ. निशित शर्मा ने 8 सवाल डूडा से पूछे हैं। युवा नेता ने कहा है कि जिस तरह एलमपुर परियोजना में आवास आवंटन योजना में अमर उजाला द्वारा भ्रष्टाचार की परत खोली गई थी। यह योजना भी कुछ इसी तरह विभागीय अधिकारियों व दलालों के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी दिखाई दे रही है।
ढाई लाख से करनी थी मदद
प्रधानमंत्री आवास योजना का लक्ष्य कमजोर आय वर्ग के लोगों को घर बनाने में मदद करना है। जिसके पास कहीं कोई घर नहीं है, प्लाट है, लेकिन बना पाने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे जरूरतमंदों को सरकार ढाई लाख रुपये की मदद दे रही है।
अब तक खुलासे
एलमपुर आवास योजना में गत वर्ष दलालों द्वारा तैयार आवंटन पत्र तक अमर उजाला ने प्रकाशित किए थे। दलालों ने आवास बेचे थे। इन सब में जेई बनकर 4 साल डूडा में जमे रहे फर्जी जेई ने दलालों का साथ दिया था। अमर उजाला के अभियान के बाद निर्माण विभाग, डूडा, विद्युत विभाग से लेकर कई स्तर पर जांचें हुई थीं। तब जाकर अपात्रों को उन आवासों से बाहर किया गया था।
पूछे सवाल
- तीनों डीपीआर में अपात्रों का जमघट, कैसे ढूंढे पात्र?
-पहली डीपीआर से छांटे गए पात्र और अपात्रों की सूची?
-कितने प्लाट व लाभार्थियों की हुई जिओ टैगिंग?
-अब तक कितनों को बांटी जा चुकी है धनराशि?
-लाभांश किस माध्यम से बांटा गया और कुल कितना लाभांश बांटा जा चुका है?
जीओ टैगिंग में लाभार्थी द्वारा सहयोग न करने, मौके पर पहुंचे स्टाफ को सही से टैगिंग की जानकारी न देने से दिक्कतें आ रही हैं। किश्त या धनराशि के आवंटन को लेकर किसी को कोई शिकायत है तो वह कार्यालय में आकर जानकारी ले सकता है। इस संबंध में पीओ डूडा कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, जिसका हर संभव निस्तारण कराया जाएगा। हर स्तर पर पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
-सत्यप्रकाश पटेल, नगर आयुक्त