अलीगढ़। असम में मदरसों में कुरान न पढ़ाने को लेकर मचे बवाल के बाद एक बार फिर मदरसा का मुद्दा गरम हो गया। एक तरफ जहां मदरसों की जरूरत और गैर जरूरत पर लंबी-चौड़ी बहस होती है। वहीं, 100 साल में एएमयू जैसा दूसरा विश्वविद्यालय नहीं बन पाया। वजह, कुछ मुसलमानों की सोच में कट्टरता होना। यह कहना है पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी का।
सलमा अंसारी ने कहा कि अगर सौ साल में मदरसा दूसरा एएमयू नहीं बन पाया है, इसकी वजह सर सैयद जैसा मजनू देश में दूसरा नहीं मिला और न ही विजन वाला कोई मुसलमान। सलमा ने कहा कि जब उन्होंने अलीगढ़ के चांदबाग में करीब 12 साल पहले मदरसा शुरू किया था, तब उनकी राह में रोड़े अटकाए गए थे। एक बार तो मदरसे की टंकी में जहर डालने का प्रयास किया गया था, लेकिन हार नहीं मानी, आज हजारों बच्चे पढ़ रहे हैं। पढ़ाई से पहले कुरान ख्वानी, गायत्री मंत्र फिर लॉर्ड ईसा की प्रार्थना होती है।
उन्होंने कहा कि मदरसा अरैबिक शब्द है, जिसका मतलब विद्यालय-पाठशाला होता है। वह मदरसे से हिंदू-मुसलमान नहीं, बल्कि इंसान तैयार कर रही हैं। सलमा ने कहा कि असम में जो कुरान व मदरसा को लेकर बवाल मचा है, वह गलत है, क्योंकि कुरान सभी मजहब की इज्जत करना सिखाता था। वह चाहती हैं कि मदरसे में पढ़ने वाले बच्चे के एक हाथ में कुरान व दूसरे हाथ में कंप्यूटर हो।
जिले में हैं 121 मदरसा
अलीगढ़। जिले में 121 मदरसा हैं। इनमें चार अनुदानित हैं, जबकि 33 मदरसा आधुनिकीकरण का हैं। इन मदरसों में करीब 20 हजार बच्चे पढ़ते हैं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के अनुसार, वर्ष 2017 से मदरसा को मान्यता नहीं दी गई है।