शहर की खराब होती वायु गुणवत्ता सीधे तौर पर शहरवासियों की सांसों पर भारी पड़ रही है। सबसे बुरा असर नवजात शिशुओं, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। बुधवार को दीन दयाल संयुक्त अस्पताल में आए मरीजों ने लगातार नाक में जलन और गले में खराश बने रहने की शिकायत की है।
निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के नहीं हैं इंतजाम
अलीगढ़ शहर में चल रहे निर्माण कार्य स्थलों पर उड़ रही धूल और गर्द पर पानी छिड़कने की कोई व्यवस्था नहीं है। बुधवार को जब पड़ताल की गई तो पाया क्वार्सी फ्लाई ओवर निर्माण स्थल पर वाटर स्प्रिंकलर शोपीस बना हुआ था। मैरिस रोड और चौराहे पर सड़क निर्माण स्थल पर स्प्रिंकलर की कोई व्यवस्था ही नहीं थी। जबकि निर्माण कार्य करने वाली एजेंसियां जब विभाग के समक्ष अपने दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं तो उसमें निर्माण के दौरान सभी मानक जैसे सुरक्षा और पर्यावरण अनुकूल काम करने के सभी वादे करते हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्माण कार्य स्थल के संबंध में निर्देश
- साइट को कवर करना- निर्माण स्थल के चारों ओर उचित ऊंचाई की विंड ब्रेकर दीवारें खड़ी की जानी चाहिएं ताकि धूल उड़कर बाहर न जा सके।
- निर्माणाधीन क्षेत्र और मचान को पूरी तरह से हरे नेट या तिरपाल से ढका जाना चाहिए।
- साइट पर और कच्चे रास्तों पर धूल को दबाने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव (दिन में कम से कम दो बार) अनिवार्य है।
- 20,000 वर्ग मीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र वाले बड़े निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन (जो बारीक पानी की बूंदों का छिड़काव करती है) लगाना अनिवार्य है।
- सीमेंट, रेत, बजरी, फ्लाई ऐश और विध्वंस मलबे जैसी धूल पैदा करने वाली सभी सामग्रियों को हमेशा कवर (तिरपाल या शेड के नीचे) करके रखना
- पत्थरों और अन्य निर्माण सामग्री की कटिंग या ग्राइंडिंग खुले में नहीं होगी।
- किसी भी प्रकार के निर्माण मलबे या सामग्री सार्वजनिक सड़कों या फुटपाथों पर डंप नहीं होगी।