जनसंघ के बाद अब भाजपा। इस दल का भी अपने जिले की सियासत में अपना इतिहास है। इसी दल से सियासत की एबीसीडी सीखकर अतरौली से चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचने वाले कल्याण सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री तक बने। उन्हें हिंदू हृदय सम्राट और राम मंदिर आंदोलन के नायक तक का दर्जा जनता ने दिया। अतरौली उनकी खुद की परंपरागत सीट रही। इसके अलावा उनके प्रभाव और शहर के वोटों में पैंठ, ध्रुवीकरण के सहारे भाजपा शहर, कोल व गंगीरी सीट पर भी अपना प्रभाव रखती आई। 2017 का चुनाव पहला मौका रहा, जब मोदी लहर में भाजपा ने तीसरे राजनीतिक दल के रूप में जिले की सातों सीटों पर जीत दर्ज करने का रिकार्ड बनाया। इससे पहले आजादी के बाद कांग्रेस, इमरजेंसी के बाद 77 के चुनाव में संयुक्त विपक्ष द्वारा बनाई गई जनता पार्टी के नाम यह रिकार्ड रहा है।
कल्याण सिंह, इंद्रपाल सिंह, दिलेर की तिकड़ी ने खोला खाता
आजादी के बाद जिले की सभी सीटों पर कांग्रेस का कब्जा रहा। दूसरे चुनाव में भी सिर्फ एक सीट निर्दल ने जीती, बाकी कांग्रेस पर रही। तीसरे चुनाव में कांग्रेस को झटका लगा। इसके बाद चौथे चुनाव में भारतीय जनसंघ ने पहली बार जिले में तीन सीटें जीतीं। इनमें अतरौली से कल्याण सिंह, शहर से इंद्रपाल सिंह व कोल से किशनलाल दिलेर ने जनसंघ के लिए यह खाता खोला। बताया जाता है कि यह चुनाव निजी प्रभाव, गठजोड़ और ध्रुवीकरण के दम पर जीता गया था। 1969 में सिर्फ कल्याण सिंह व 1974 में फिर कल्याण सिंह व इंद्रपाल सिंह जीते।
1977 में जनसंघ को मिली थीं तीन सीटें
इमरजेंसी के बाद 1977 का चुनाव संयुक्त विपक्ष द्वारा जनता पार्टी के बैनरतले चुनाव लड़ा गया। इस चुनाव में जनसंघ के खाते में तीन सीटें गईं। इनमें शहर सीट पर एएमयू से जनसंघ की छात्र शाखा विद्यार्थी परिषद के प्रमुख मोअज्जिज अली बेग, कोल से किशनलाल दिलेर व अतरौली से कल्याण सिंह थे। तीनों जीते। हालांकि जनता पार्टी सभी सीटें जीतीं। 1980 में इंदिरा लहर में भाजपा के बैनरतले चुनाव लड़ा गया, जिसमें पार्टी अतरौली सहित सभी सीटें हार गई। फिर 1985 में बीजेपी-लोकदल गठबंधन से दो सीट भाजपा को अतरौली व कोल मिलीं, दोनों पर कल्याण सिंह व किशनलाल दिलेर ने जीत दर्ज की। इसके बाद 1989 में अतरौली व शहर से कल्याण सिंह व केके नवमान ने जीत दर्ज की।
राम लहर में पहली बार जिले में 5 सीटें जीतीं
1991 में राम लहर के चुनाव में जिले में पहली बार भाजपा ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की, जिनमें सिर्फ इगलास व बरौली सीट हारी। बाकी पांच में अतरौली, शहर, कोल, गंगीरी व खैर पर जीत दर्ज की। 1993 के चुनाव में चार सीटें जीतें। इस बार इगलास, गंगीरी और खैर हारे, जबकि अतरौली, शहर, कोल, बरौली जीते। 1996 में फिर 1991 का परिणाम रिपीट हुआ। अतरौली, गंगीरी, कोल इगलास व खैर पर जीत दर्ज की, जबकि बरौली व शहर में हारे।
2002 और 2012 में हालत रही बेहद पतली
जिले में 2002 के चुनाव में अतरौली छोड़कर जिले की छह सीटों पर भाजपा को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। यह बसपा की लहर वाला चुनाव था। हालांकि 2007 के चुनाव में अतरौली के साथ गंगीरी पर भाजपा ने वापसी की, मगर इस बार भी पांच सीटें हारी। इसके बाद 2012 के चुनाव में तो और परिणाम खराब रहा। अतरौली सहित सभी सातों सीटों पर भाजपा ने हार का सामना किया। इस चुनाव में सपा व रालोद ने बुरी तरह टक्कर दी। मगर 2017 में जिले में कांग्रेस व जनता पार्टी के बाद भाजपा ने तीसरी बार सभी सीटें जीतने का रिकार्ड बनाया है।
जनसंघ और भाजपा के परिणाम एक नजर में
- 1951, 1957, 1962 : किसी सीट पर जीत नहीं।
- 1967 : अतरौली से कल्याण सिंह, शहर से इंद्रपाल सिंह, कोल से किशनलाल दिलेर जनसंघ से जीते।
- 1969 : अतरौली में कल्याण सिंह जनसंघ से जीते।
- 1974 : अतरौली से कल्याण सिंह, शहर से इंद्रपाल सिंह जनसंघ से जीते।
- 1977 : अतरौली से कल्याण सिंह, शहर से मोअज्जिज अली बेग, कोल से किशनलाल दिलेर जनता पार्टी के बैनर पर जीते।
- 1980 : भाजपा के बैनरतले अतरौली सहित सभी सीटें हारे।
- 1985 : अतरौली से कल्याण सिंह, कोल से किशनलाल दिलेर भाजपा से जीते।
- 1989 : अतरौली से कल्याण सिंह, शहर से केके नवमान जीते।
- 1991 : गंगीरी से राम सिंह, अतरौली से कल्याण सिंह, शहर से केके नवमान, कोल से किशनलाल दिलेर, खैर से महेंद्र सिंह जीते।
- 1993 : अतरौली से कल्याण सिंह, शहर से केके नवमान, कोल से किशनलाल दिलेर, बरौली से मुनीष गौड़ जीते।
- 1996 : गंगीरी से राम सिंह, अतरौली से कल्याण सिंह, कोल से रामसखी कठेरिया, इगलास से मलखान सिंह, खैर से डॉ. ज्ञानवती जीते।
- 2002 : अतरौली से कल्याण सिंह जीते।
- 2007 : गंगीरी से राम सिंह, अतरौली से प्रेमलता वर्मा जीते।
- 2012 : सभी सीट हारे।
- 2017 : छर्रा से रवेंद्रपाल सिंह, अतरौली से संदीप सिंह, शहर से संजीव राजा, कोल से अनिल पाराशर, इगलास से पहले राजवीर दिलेर उपचुनाव में राजकुमार सहयोगी, बरौली से दलवीर सिंह, खैर से अनूप प्रधान जीते।