फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलीगढ़ : 69 साल पहले दादा बने थे एएमयू चांसलर, अब पौत्र संभाल रहे कुर्सी

विज्ञापन
सैयदना मुफद्दल सैफ उद्दीन। - फोटो : CITY OFFICE
विज्ञापन
इकराम वारिस, अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के चांसलर पद की जिम्मेदारी सैयदना खानदान की तीसरी पीढ़ी संभाल रही है। 69 साल पहले एएमयू के चांसलर सैयदना ताहिर सैफउद्दीन बने थे। अब यह जिम्मा उनके पौत्र सैयदना मुफद्दल सैफ उद्दीन संभाल रहे हैं।
विज्ञापन

एक मदरसे से यूनिवर्सिटी का सफर तय करने में एएमयू को 45 साल लग गए। मदरसे की स्थापना से लेकर अब तक इस इदारे की उम्र 147 साल हो चुकी है। यूनिवर्सिटी बनने के बाद एक खानदान से कई लोगों का चांसलर बनने का रिकॉर्ड सैयदना परिवार के पास ही है।
12 अप्रैल 1953 को एएमयू के चांसलर सैयदना ताहिर सैफ उद्दीन बने। 1966 में मिंटो सर्किल का नाम तत्कालीन चांसलर सैयदना ताहिर सैफ उद्दीन के नाम पर रखा गया, जिसकी स्थापना 1875 में सर सैयद अहमद खान ने की थी, जो बाद में मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज के नाम से जाना गया।
विज्ञापन

अब यह कॉलेज यूनिवर्सिटी में बदल गया है। सैयदना ताहिर सैफ उद्दीन के बाद उनके बेटे 3 अक्तूबर 1999 को सैयदना मोहम्मद बुरहान उद्दीन चांसलर बने। पिता के बाद उनके बेटे सैयदना मुफद्दल सैफ उद्दीन 11 अप्रैल 2015 को एएमयू के चांसलर बने, जो अभी भी हैं।
एएमयू पीआरओ के एसोसिएट मेंबर इंचार्ज डॉ. राहत अबरार ने बताया कि सैयदना परिवार से तीन चांसलर बने, जबकि बेगम सुल्तान जहां परिवार से दो सदस्य चांसलर रहे। पहली चांसलर बेगम सुल्तान जहां भोपाल बनीं। इनके बाद उनके बेटे नवाब हमीद उल्लाह खान चांसलर बने। वहीं, नवाब अहमद सईद खां छतारी एएमयू चांसलर बने। इनके बाद उनके बेटे नवाब इबभने सईद छतारी प्रो. चांसलर बने।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें