दुष्कर्म के जिस मुकदमे में थाना पुलिस ने सुनवाई नहीं की। उसी मुकदमे में अदालत ने आरोपी को 20 वर्ष कैद व जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला एडीजे फास्ट ट्रैक प्रथम अनुपम सिंह की अदालत से सुनाया गया है। इस मुकदमे में एक बाल अपचारी की पत्रावली पहले ही किशोर न्याय बोर्ड चली गई थी।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी कुलदीप सिंह तोमर के अनुसार, घटना दो अक्तूबर 2015 की है। मूल रूप से हरदुआगंज की महिला 15 वर्षीय बेटी संग सासनी गेट क्षेत्र में रहकर कोठियों में काम करती थी। घटना के दिन मां-बेटी काम पर जा रहे थे।
तभी दोपहर में इलाके के एक नामजद पंकज, उसके सहयोगी बाल अपचारी व दो अन्य ने दोनों को तमंचे के बल पर खींचकर घर में बंद किया। जिसमें एक कमरे में महिला को बंधक बनाया, जबकि दूसरे कमरे में बेटी संग दुष्कर्म किया।
एक घंटे बाद उन्हें छोड़ा गया। मामले में थाना स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो न्यायालय की शरण ली गई। अदालत के आदेश पर पंकज व उसके साथी पर मुकदमा दर्ज हुआ। न्यायालय में चार्जशीट दायर की गई। तभी से आरोपी पंकज जेल में है। अदालत ने आरोपी को 20 वर्ष कैद व 12 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। वहीं जुर्माना राशि पीड़ित को देने के निर्देश दिए हैं।
अपहरण के बाद दुष्कर्म में 10 साल कैद की सजा
एडीजे विशेष पॉक्सो ओमवीर की अदालत से अपहरण के बाद किशोरी संग दुष्कर्म के आरोपी को दस साल कैद व जुर्माने की सजा सुनाई है। विशेष लोक अभियोजक संजय शर्मा व लव बंसल के अनुसार मुकदमे के अनुसार गोंडा क्षेत्र की 14 वर्षीय किशोरी 19 सितंबर 2015 को खेत पर चारा लेने गई।
तभी उसे नामजद अगवा कर ले गए। मामले में मथुरा यमुना पार के खेड़ा के प्रहलादी, उसके भाई विजय, राजवीर, धर्मवीर व बुलंदशहर सालाबाद छतारी के रहने वाले भांजे अरविंद को आरोपी बनाया गया। न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान अरविंद को आरोपी पाया गया, जबकि अन्य चारों को बरी किया गया। न्यायालय ने मामले में आरोपी को दस साल कैद व 35 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। वहीं जुर्माना राशि पीड़ित को देने के निर्देश दिए हैं।
अपहरण में जमानत अर्जी खारिज
एडीजे विशेष एससीएसटी की अदालत से अपहरण में जमानत अर्जी खारिज की गई है। एडीजीसी चमन प्रकाश शर्मा के अनुसार बन्नादेवी के पूरन पर अनुसूचित युवती के अपहरण का आरोप है। जिसकी जमानत खारिज की गई है।