चुनावी घोषणा पत्र के अनुसार मुसलमानों को आरक्षण नहीं दिए जाने का मामला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अलीगढ़ तक पहुंच गया है। न्यायालय ने इस मामले में थाना सिविल लाइन को मामला दर्ज कर 15 मई तक रिपोर्ट देने की हिदायत दी है।
एएमयू के एमएम हॉल के छात्र जानिब हसन पुत्र जावेद अली ने मार्च के अंतिम सप्ताह में वकील के माध्यम से सपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एवं सचिव एसआरएस यादव को कानूनी नोटिस दी थी। उसका जवाब 15 दिनों में देना था।
एएमयू के पूर्व कैबिनेट मेंबर रह चुके जानिब हसन ने आरोप लगाया था कि 2012 के चुनाव के दौरान रंगनाथ मिश्र एवं सच्चर कमेटी की सिफारिशों को मानते हुए मुसलमानों को आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक स्तर पर दलितों से भी बदतर माना था और मुसलमानों को पिछड़ा मानते हुए दलितों की तरह जनसंख्या के आधार पर अलग से आरक्षण दिए जाने, नए शैक्षणिक संस्थान खोलने की घोषणा की थी। इसके साथ ही 16 घोषणाएं अपने घोषणा पत्र में की थीं।
यह भी कहा था कि मुसलमानों को 18 प्रतिशत आरक्षण देंगे। लेकिन सत्ता में आने के बाद आज तक सच्चर कमेटी एवं रंगनाथ मिश्र की सिफारिशों को उत्तर प्रदेश में लागू नहीं किया गया। न ही मुसलमानों को आरक्षण दिया गया। जानिब हसन का कहना है कि घोषणा पत्र से प्रभावित होकर मुसलमानों ने 2012 में मतदान किया और सपा सत्ता में आई।
घोषणा पत्र के अनुसार, मुसलमानों को कुछ न दिए जाने से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आपने मुसलमानों का मत प्राप्त करने के उद्देश्य से छल, फरेब, धोखा धड़ी करते हुए झूठे घोषणा पत्र के आधार पर मत प्राप्त किए हैं। छात्र नेता जानिब हसन के वकील धनवीर सिंह के माध्यम से सपा अध्यक्ष एवं सचिव को नोटिस दिया था।