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हाथरस कांड से लिया सबक...पोस्टमार्टम से लेकर अंतिम संस्कार तक सावधानी

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किशोरी के लिए इंसाफ को लेकर नारे लगाते लोग। - फोटो : CITY OFFICE
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अभिषेक शर्मा
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परिवार को विश्वास में न ले पाने के कारण हाथरस के चंदपा में जो कुछ हुआ। उस तरह की फजीहत से बचने के लिए जिला पुलिस-प्रशासन ने उस घटना से अकराबाद कांड में सबक लिया। यही वजह रही कि रात में पोस्टमार्टम कराने से लेकर अंतिम संस्कार तक की प्लानिंग टाल दी गई। सब कुछ दिन में फूल प्रूफ मैनेजमेंट और परिवार को विश्वास में लेकर किया गया। हालांकि पोस्टमार्टम केंद्र से लेकर अंतिम संस्कार तक कई बार मिस मैनेजमेंट की कोशिश हुई। इसके चलते बमचक मची रही। मगर परिवार के साथ होने के कारण सब कुछ बिना किसी बड़े विवाद के निपट गया। तब जाकर अधिकारियों ने राहत महसूस की।
तड़के पांच बजे लिखा जा सका मुकदमा
रविवार देर शाम शव मिलने के बाद पहले तो पुलिस ने शव पोस्टमार्टम केंद्र भिजवा दिया था। फिर यहां से परिवार के कुछ सदस्यों को साथ लेकर बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष तिलकराज यादव, जिलाध्यक्ष रतनदीप सिंह, महेश चौधरी आदि अकराबाद थाने पहुंचे। जहां चार बजे तक इस बात को लेकर नोकझोंक होती रही कि बसपा नेता मुकदमे में उन दो लोगों को नामजद कराना चाहते थे, जो पास के खेतों में पानी लगा रहे थे। मगर पुलिस का कहना था कि जब इस बात का कोई साक्षी नहीं है तो फिर नामजद करना गलत है। एसपी देहात शुभम पटेल की ओर से उन्हें भरोसा दिलाया गया कि वे मुकदमा अज्ञात में दर्ज कराएं। पुलिस शत प्रतिशत घटना खोलेगी। इस पर मामा ने अज्ञात लोगों के खिलाफ तहरीर दी, जब जाकर हत्या, दुष्कर्म व एससीएटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
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पोस्टमार्टम केंद्र पर सुबह से सियासी जमवाड़ा
सोमवार को दिन निकलने के बाद से ही पोस्टमार्टम केंद्र पर सियासी जमावाड़ा लगने लगा। यहां सबसे पहले आजाद समाज पार्टी के नेता चौ.महेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष राहुल कुमार आदि तमाम कार्यकर्ताओं संग पहुंच गए। इसके बाद बसपा के राज्य सभा सांसद मुनकाद अली, मेयर मो.फुरकान जिलाध्यक्ष रतन दीप सिंह, सूरज सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष तिलकराज यादव, महेश चौधरी आदि तमाम बसपाई पहुंच गए। इसी बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव व हरियाणा प्रभारी विवेक बंसल, ब्रजेश शर्मा, आनंद बघेल, सागर सिंह तोमर आदि तमाम कांग्रेसी पहुंच गए। इसी बीच सपा जिलाध्यक्ष गिरीश यादव, मनोज यादव, रंजीत चौधरी, कौशल दिवाकर सहित तमाम सपाई भी यहां पहुंच गए। सभी ने परिवार से मुलाकात की और परिवार को मुआवजा, मकान, नौकरी आदि की मांग उठाई।
अंदर जाने और मुआवजे को लेकर नोक-झोंक
पोस्टमार्टम केंद्र पर विवाद ने उस समय जन्म लिया। जब कुछ नेता पोस्टमार्टम केंद्र के अंदर जाने की जिद कर रहे थे। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें इस तर्क के साथ रोक दिया कि अंदर परिवार, एक अधिवक्ता मौजूद हैं तो भीड़ की क्या जरूरत है। किसी तरह बातचीत का यह तय हुआ कि एक व्यक्ति अंदर जा सकता है। इस पर बात बनी। इसके बाद जब पोस्टमार्टम के बाद शव चलने लगा तो मुआवजे पर भीम आर्मी कार्यकर्ता अड़ गए। यहां काफी नोकझोंक व बहस हुई। इस पर एसपी क्राइम ने विश्वास दिलाया कि मुआवजा दिया जाएगा। मगर सबके सामने घोषित न कराएं। इस दौरान कुछ युवक मौके पर ही मुआवजा घोषित करने की जिद करने लगे। इस पर नोकझोंक के बाद किसी तरह बात बनी और शव को पुलिस की कड़ी सुरक्षा व गाड़ियों के काफिले के बीच एंबुलेंस से सासनी गेट स्थित घर ले जाया गया।
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शव कहां जाएगा, इस पर भी बन रहा था विवाद
पोस्टमार्टम के बाद शव कहां जाएगा, इसे लेकर विवाद बना। काफी संख्या में लोग चाह रहे थे कि शव गांव ले जाया जाए। मगर परिवार के ज्यादातर लोग चाह रहे थे कि शव सासनी गेट पैतृक घर पर ले जाया जाए। इसे लेकर विवाद की स्थिति बनी। मगर परिवार ने जब सार्वजनिक सहमति दे दी तो सभी ने चुप्पी साध ली।
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