किशोरी के परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे समाजवादी पार्टी के नेता।
- फोटो : CITY OFFICE
हाथरस कांड की तर्ज पर इस घटना में सियासी एंट्री के बाद पुलिस प्रशासन को लग रहा था कि कहीं कोई बात न बिगड़ जाए। मगर सुबह 10 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक हुए घटनाक्रम में तीन बार परिवार ने नेताओ का झटका देकर विषय से अलग रहने का इशारा किया। यही वजह रही कि पोस्टमार्टम केंद्र के बाद ज्यादातर सियासी लोग सीधे अंतिम संस्कार के समय चुपचाप बैठे तमाशा देखते रहे।
हुआ यूं कि दोपहर में पोस्टमार्टम के समय जब कुछ नेताओं ने पोस्टमार्टम के अंदर जाने की जिद की तो अधिकारियों ने मना किया। बताया कि अंदर मां, बुआ व एक वकील हैं। किसी तरह एक अन्य नेता अंदर गए और पोस्टमार्टम देखना चाह रहे थे। मगर मां व बुआ ने साफ कह दिया कि हम किसी बाहरी को अपनी बेटी का शव इस तरह नहीं देखने देंगे।
इस पर वह नेताजी बाहर आ गए। इसके बाद परिवार की महिलाओं ने नेताओं ने बार-बार पूछा कि मुआवजा कुछ तय हो गया है, महिलाएं कहती रहीं कि अभी कुछ नहीं तो जवाब आता कि चलो हम बताते हैं कैसे तय नहीं करेंगे। इसी मंशा के तहत घर से शव यात्रा पैदल ले जाने की बात तय हुई और आगरा रोड पर जाम लगाकर बवाल का प्रयास किया। मगर उस समय भी परिवार ने इस घटनाक्रम से खुद को अलग रखा।
इस बीच मां को आगे लाने की कोशिश की। मगर बेहाल मां न्याय मांगने के अलावा ज्यादा कुछ कह न सकी। इसके बाद अंतिम बार अंतिम संस्कार के समय मुआवजे का विषय आया तो बुआ ने टका सा जवाब देकर सबकी बोलती बंद कर दी। कहा कि कम से कम मिट्टी लग जाने दो, हमें प्रशासन पर भरोसा है। इस पर फिर बात कर लेंगे। इसके बाद नेता चुप्पी साधे रहे।