मंडलायुक्त जीएस प्रियदर्शी के निर्देशानुसार गर्मी के मौसम में किसानों हित के दृष्टिगत उप निदेशक कृषि अनिल कुमार ने खेतों में गर्मी में गहरी जुताई करने की सलाह दी है। इससे फसल उत्पादन में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि आईपीएम यानी इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट तकनीकी के तहत भौतिक, यांत्रिक एवं जैविक विधियों का प्रयोग कर उत्पादन लागत कम किया जा सकता है। इसमें खेत की गहरी जुताई प्रमुख क्रिया है।
अनिल कुमार ने बताया कि रबी की फसल कटाई के उपरांत खरीफ की फसल की तैयारी के लिये गर्मी में खेतों की गहरी जुताई करनेे से तेज धूप में खरपतवार अवशेष, हानिकारक कीड़े, अंडे, लार्वा आदि नष्ट हो जाते हैं। वर्षा जल मृदा में गहराई तक पहुंचता है। नाइट्रोजन आदि तत्वों की वृद्धि होती है। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष, खरपतवार आदि पानी के संपर्क में आकर थोड़ी सी यूरिया से सड़कर खाद में बदल जाते हैं, इससे किसानों को कम खाद का प्रयोग करना पड़ता है। मिट्टी में वायु का संचार
बढ़ जाता है। वायु संचार बढ़ने से फसल की जड़ों का अच्छा विकास होता है। इसलिये लाभप्रद खेती के लिये गहरी जुताई अति आवश्यक एवं महत्वपूर्ण है।