कौशल कुमार ओझा
महानगर में आगरा रोड की हवा सबसे खराब है। बारहद्वारी, एटा चुंगी, कलेक्ट्रेट, कंपनीबाग, दुबे का पड़ाव एवं सेंटर प्वाइंट की हवा भी सेहत के लिए महफूज नहीं है। इन क्षेत्रों की वायु गुणवत्ता मानक से बहुत अधिक है। अलीगढ़ स्मार्ट सिटी के अंतर्गत लाए गए यंत्र में रिकार्ड एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) बता रहा है कि अधिकतर क्षेत्रों की हवा सेहत के लिए हानिकारक है।
महानगर में आगरा रोड पर वायु प्रदूषण का स्तर 144 एक्यूआई है जो कि चिंताजनक है। बुधवार को जब अमर उजाला की टीम आगरा रोड पर पहुंची तो कई जगह जाम की स्थिति थी। गांधी पार्क से लेकर सासनी गेट चौराहे तक कमोवेश जाम की समस्या आम है। स्थानीय दुकानदारों एवं नागरिकों ने बताया कि कुछ माह पहले प्रशासन द्वारा गांधी पार्क से सासनीगेट की तरफ जाने के लिए बड़े वाहनों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इससे कुछ राहत मिली है। हालांकि सासनीगेट की तरफ से गांधी पार्क की ओर बड़े वाहनों को चलने दिया जा रहा है। लोग यह भी मानते हैं कि वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण वाहन एवं जाम है। इसके अतिरिक्त सड़कों पर गंदगी एवं खुदाई आदि भी प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है।
एक तरफ से बड़े वाहनों के चलने पर रोक लगने के बाद आगरा रोड पर स्थिति में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी प्रदूषण का स्तर मानक से बहुत अधिक है। मेरे पास सांस, अस्थमा एवं एलर्जी के मरीज उपचार के लिए आते हैं।
डॉ. सुधांशु वार्ष्णेय, हाथरस अड्डा
गांव-घर की हवा में ताजगी होती है। जब भी शहर में आती हूं तो दम घुटता है। वाहन के इंधन एवं धुएं की गंध आती है। धूल आदि से सांस लेना मुश्किल होता है। बेचैनी होती है एवं मन घबराता है। इसका कुछ इंतजाम होना चाहिए।
- ममता, गृहणी, इगलास
अब जाम की समस्या में कुछ कमी आई है, लेकिन प्रदूषण अभी भी बरकरार है। धूल के कारण दुकान में गंदगी भर जाती है। सांस लेने में परेशानी होती है। ठीक से यातायात नियमों का पालन लोग नहीं करते। यातायात पुलिस भी ठीक से काम करती तो कुछ सुधार संभव है।
- राजकुमार वार्ष्णेय, व्यापारी, हाथरस अड्डा
किसी भी क्षेत्र में 100 एक्यूआई खतरे की घंटी है। अगर किसी क्षेत्र में इससे अधिक एयर क्वालिटी इंडेक्स पाया जाता है, इसका मतलब है कि उस क्षेत्र में प्रदूषण की स्थिति लाल श्रेणी में है। 100 से अधिक एक्यूआई होने पर स्वास्थ्य प्रभावित होने लगता है।
- डॉ. जेपी सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
अलीगढ़ के लिए ही नहीं बल्कि देश के लिए प्रदूषण बड़ी समस्या है। यह हमारे जीवन में जहर घोल रहा है। दूषित वातावरण में रहकर लोग बीमार हो रहे हैं और जीवन गंवा रहे हैं। आर्थिक कठिनाइयों में उपचार में खर्च करना पड़ता है। शीर्ष वरीयता देकर समस्या का समाधान होना चाहिए।
- डॉ. भरत वार्ष्णेय, सचिव, आईएमए, आगरा रोड
प्रदूषण रोकने के लिए सभी को करना होगा प्रयास
आईएमए के सचिव डॉ. भरत वार्ष्णेय का कहना है कि यह बड़ी समस्या है। धीमे जहर की तरह है, जो सभी को बीमार करता है। बच्चे, गर्भवती महिला, बुजुर्ग और बीमार लोगों की तकलीफ बढ़ जाती है। स्मार्ट सिटी में प्रदूषण रोकने के लिए सभी को मिल जुल कर प्रयास करना होगा। डॉ. भरत कहते हैं कि प्रदूषण को बढ़ने से रोकने के लिए प्रशासन स्तर से ठोस प्रयास होना चाहिए। शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा मिलना चाहिए। हमें भी पेट्रोल एवं डीजल से चालित वाहन का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए। ग्रुप शेयरिंग अच्छा आइडिया है। इलेक्ट्रिक वाहन समय की जरूरत है। कार व स्कूटर आदि की नियमित सर्विस कराते रहना चाहिए। यातायात नियमों का पालन कर हम प्रदूषण के स्तर को कुछ कम करने में सहायक बन सकते हैं। एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए।
एक्यूआई का गणित
0 से 50 - अच्छी वायु गुणवत्ता।
50 से 100 - मध्यम लेकिन मामूली स्वास्थ्य चिंता हो सकती है।
100 से 150 - संवेदनशील समूहों के लिए अस्वास्थ्यकर। बच्चे, बुजुर्ग और रोगी बाहर जाने से बचें।
150 से 200 - स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ना शुरू हो जाता है।
200 से 300 - खराब, पूरी आबादी प्रभावित होने की आशंका।
300 से 500 - खतरनाक, स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव की आशंका।
विभिन्न क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता की स्थिति
स्थान एक्यूआई
आगरा रोड 144
बारहद्वारी 141
एटा चुंगी 141
कलेक्ट्रेट 138
कंपनीबाग 138
दुबे का पड़ाव 138
सेंटर प्वाइंट 137
लाल डिग्गी 132
रसलगंज 131
मसूदाबाद 129