जिला शासकीय अधिवक्ता जितेंद्र सिंह के मुताबिक, कानून कहता है कि अगर सात साल में कोई अदालत में नहीं आ रहा है तो उसे मृत मान लिया जाए। लेकिन इसके लिए भी पुलिस की रिपोर्ट जरूरी है। कई बार पुलिस वारंट और समन आदि के सत्यापन के लिए मौके पर नहीं जाती है। मुकदमे में आरोपियों के पते बदल जाते हैं। इसके चलते यह समस्या आती है।
अदालत के आदेश का क्रियान्वयन पुलिस को ही कराना है
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट शैलेंद्र सिंह कहते हैं कि सात वर्ष में किसी के लगातार हाजिर नहीं होने पर मृत मानने का प्रावधान है। इसका क्रियान्वयन अदालत पुलिस के ही माध्यम से कराती है। पुलिस को ही वारंट, समन आदि की तामील कराने में तत्परता दिखानी होगी।