अब तक की पूछताछ में अलीगढ़, हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद, एटा, कासगंज, मैनपुरी, इटावा, मेरठ, हापुड़, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बुलंदशहर, बदायूं, बरेली, अमरोहा, संभल, मथुरा आदि जिलों में भेजे जाने की पुष्टि हुई है।
ये तोड़े नियम व नुकसान
- फैक्टरी में केमिकल की आड़ में मिलावटी पेट्रोलियम पदार्थ बनाना।
- अग्निशमन की बिना एनओसी के टैंकर से माल का परिवहन कराना।
- आपूर्ति, निर्यात व जीएसटी शुल्क की चोरी बड़े स्तर पर की गई है।
- जिन वाहनों में यह पेट्रोल-डीजल पड़ा, उनका इंजन जल्द खराब।
- हाईस्पीड व लाइट डीजल पेट्रोल अधिनियम व वितरण अधिनियम तोड़ा।
ऐसे चल रहा कारोबार, उगले संचालक-प्रबंधक ने राज
एसटीएफ के अनुसार इस फैक्टरी के संचालक कन्हैयालाल वाष्र्णेय व प्रबंधक सर्वेश ने स्वीकारा है कि यह फैक्टरी कन्हैयालाल की पत्नी चित्रा व बेटे गौरव के नाम से है। उन्हीं के नाम से उसके पास पेट्रो केमिकल-एक्सप्लोसिव बिक्री व रिफाइनरी का लाइसेंस भी है। उसने स्वीकारा कि वह रुपये कमाने के लालच में आकर मिलावटी व बायो पेट्रोल डीजल बनाने लगा। उसके यहां कच्चा माल क्रूड ऑयल गुजरात सहित कुछ अन्य जगहों से मंगाया जाता है। जिनमें तय मानकों के अनुसार केमिकल मिलाकर पेट्रोल डीजल सहित अन्य पेट्रोलियम पदार्थ बनाया जाता है। दोनों ने पिछले कई वर्ष लगभग दो दशक से इस धंधे के संचालन की बात स्वीकारी है। साथ में विशेषकर पश्चिमी यूपी के जिलों के साथ-साथ पवन सहित कुछ अन्य भरोसेमंद मीडियेटरों के सहारे प्रदेश भर में माल भेजने की बात स्वीकारी है।
दोनों ने स्वीकारा कि जब उनके यहां से टैंकर माल लेकर जाता था, तब उसे वे फर्जी तरीके से केमिकल के बिल देते थे। ताकि रास्ते में कोई पकड़ धकड़ न हो सके। इसी आड़ में यह गोरखधंधा चल रहा था।
फैक्टरी में 96 हजार लीटर पेट्रोलियम पदार्थ मिला
शुक्रवार शाम जब एसटीएफ टीम यहां पहुंची, तब आपूर्ति विभाग से निरीक्षक कृष्णवीर सिंह, दिनेश पटेल व विपुल प्रताप सिंह को बुलाया गया था। उनके द्वारा एसटीएफ को फैक्टरी में अलग अलग माल के छह नमूने लेकर दिए गए। उस समय फैक्टरी में 13 टैंकों में पेट्रोलियम पदार्थ था। तीन-तीन चैंबरों वाले टैंकों में 96 हजार लीटर पेट्रोलियम पदार्थ होने का अनुमान है। इसके अलावा आठ छोटे ड्रमों में भी माल मिला है।