जिले की 48 शत्रु संपत्तियों पर अवैध कब्जे हो गए। 75 साल में इन संपत्तियों में से अधिकांश को लोगो ने दो से तीन बार बेच भी दिया। खरीद फरोख्त के समय कोई रोक नहीं लगी, अब इस संपत्ति का नए सिरे से सत्यापन और अवैध कब्जे हटाने के लिए प्रदेश सरकार ने जिला प्रशासन को आदेश जारी किए हैं। जिसमें से पान दरीबा की संपत्ति की विशेष जांच कराने कराई जा रही है। इसी सिलसिले में सिटी मजिस्ट्रेट और तहसीलदार कोल कीे टीम ने निरीक्षण किया।
एडीएम प्रशासन डीपी पाल ने बताया कि वर्ष 1947 में देश के बंटवारे के समय कुछ लोग पाकिस्तान चले गए थे। लेकिन उनकी संपत्तियां यही रह र्गइं। इन्हें शत्रु संपत्ति का नाम दिया गया है। तहसीलों में इसकी पहचान भी शत्रु संपत्ति के नाम से ही होती है। इसका मालिकाना हक जिला प्रशासन के पास है। लोकसभा में भी शत्रु संपत्ति को सरकारी घोषित करने के लिए विधेयक पास हो चुका है। उन्होंने बताया कि जिले में 48 शत्रु संपत्ति राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं। इसमें सबसे अधिक शत्रु संपत्ति कोल तहसील में हैं। खैर, गभाना व अतरौली में भी शत्रु संपत्तियां हैं। सभी संपत्तियों का सत्यापन कराया जा रहा है। रिपोर्ट आने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।