कोरोना वायरस महामारी के बीच ही अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन (अमुटा) ने महामारी के नाम पर समाज में विभाजन पैदा करने का आरोप राज्य सरकार पर लगाया है। इस संबंध में शुक्रवार को अमुटा की एक विशेष बैठक हुई जिसमें एक प्रस्ताव पारित कर मांग की गई के महामारी के नाम पर एक समुदाय विशेष को निशाना बनाने वालों पर कार्रवाई की जाए।
इस संबंध में एक ज्ञापन राष्ट्रपति को प्रेषित किया गया। अमुटा के सचिव प्रोफेसर नजमुल इस्लाम कहते हैं कि यह गंभीर चिंता का विषय है कि आज महामारी को भी एक समुदाय से जुड़ने के लिए तर्क गढ़े जा रहे हैं और आधार तैयार किया जा रहा है। अमुटा इस पर गहरी चिंता व्यक्त करती है। आज हालात यह हैं कि राजनीतिक असहमति होने पर देशद्रोह के मुकदमे दर्ज कराए जाते हैं। जो लोग इसका शिकार हुए हैं उनकी सूची बहुत लंबी है। लेकिन फिर भी सिद्धार्थ वरदराजन, उमर खालिद, डॉ. जफर इस्लाम, भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मोहम्मद मोहसिन आदि ऐसे नाम लिए जा सकते हैं।
आज समाज में इस्लामोफोबिया फैलाया जा रहा है। राष्ट्रपति से मांग की गई है कि वह इन सब बातों का संज्ञान लेकर ऐसी प्रवृत्तियों पर रोक लगाएं। प्रोफेसर नजमुल इस्लाम ने कहा की लॉकडाउन के समय जो प्रवासी मजदूर तकलीफ सहकर सफर करने को मजबूर हैं, हमारी संवेदना उनके साथ हैं। सरकार ने अचानक लॉकडाउन का फैसला लेकर अपनी अदूरदर्शिता और जल्दी बाजी का परिचय दिया है।