नुमाइश में भेलपुरी, सोफ्टी, पिज्जा, बर्गर, चाऊमीन, जलेबी, छोले-भटूरे, टिक्की, पड़ाके, हलुवा-परांठा, खजुला, नान खटाई, पेटीज, अमेरिकन भुट्टा, फायर पान-बिस्कुट, मीठा पान आदि खाने के व्यंजन हैं। इन सब के होते हुए भी, आलू के बरूले खाने वालों की भीड़ सबसे ज्यादा देखी जाती है।
अलीगढ़ की नुमाइश में वैसे तो खाने के लिए एक से बढ़कर एक व्यंजन हैं, पर चटपटे आलू के बरूले हरी चटनी के साथ का अपना अलग ही महत्व है। बरूले शायद नुमाइश में सबसे ज्यादा खाया जाने वाली चाट है। जिसके लिए यह कहा जाता है कि नुमाइश अगर आप आए हैं और आपने आलू के बरूले नहीं खाए, तो फिर कुछ नहीं खाया।
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नुमाइश में भेलपुरी, सोफ्टी, पिज्जा, बर्गर, चाऊमीन, जलेबी, छोले-भटूरे, टिक्की, पड़ाके, हलुवा-परांठा, खजुला, नान खटाई, पेटीज, अमेरिकन भुट्टा, फायर पान-बिस्कुट, मीठा पान आदि खाने के व्यंजन हैं। इन सब के होते हुए भी, आलू के बरूले खाने वालों की भीड़ सबसे ज्यादा देखी जाती है। हुल्लड़ बाजार, कृषि कक्ष वाले मार्ग पर आलू के बरूले बेचने वालों की कई ढकेल और दुकानें हैं।
आलू के बरूले नुमाइश में सबसे सस्ती चाट है। बरूले 10 रूपये में 250 ग्राम, तो कहीं 20 रूपये में 250 ग्राम मिल जाते हैं। हुल्लड़ बाजार में बरूले विक्रेता मुबीन खान ने बताया कि बरूले के लिए उबले हुए आलू, बेसन, धनिया पाऊडर, अजवाइन, गर्म मसाला, लाल मिर्च पाऊडर, नमक, तेल और पानी की जरूरत होती है। बेसन में लिपटे आलू के बरूलों को तेज में सेका जाता है। उसके बाद कागज से दबाकर फोड़ दिया जाता है। उसके ऊपर हरी धनिया की चटनी डालकर खाया जाता है। हरी धनिया की चटनी में हरा धनिया, हरी मिर्च, पानी आदि डालकर तैयार किया जाता है, जिसकी अधिक डिमांड रहती है।
आलू के बरूले खाने के बाद लोग घरों के लिए पैक कराके भी ले जाते हैं। बरूले महिलाओं को बहुत पसंद हैं। नुमाइश शुरू होने से लेकर रात तक बरूले खाने वाले लगातार देखे जा सकते हैं। बरूले के साथ मिलने वाली हरी चटनी को लोग बिना बरूले के भी स्वाद से खा जाते हैं।