कोरोना काल में कोविड प्रोटोकॉल और लॉकडाउन के उल्लंघन के आरोप में दर्ज मुकदमों में अब जनप्रतिनिधियों को भी राहत मिलने की राह खुल गई है। शासन ने अलीगढ़ समेत प्रदेश के 18 जिलों में वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों पर दर्ज 33 कम गंभीर मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। संबंधित जिला प्रशासन को अदालतों में मुकदमे वापसी के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल करने और उसकी रिपोर्ट शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद इन मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट से विधिवत अनुमति ली जाएगी।
इस सूची में अलीगढ़ के चार राजनेता शामिल हैं। इनमें नगीना के सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर, पूर्व विधायक वीरेश यादव, पूर्व विधायक जमीरउल्लाह और पूर्व विधायक ठाकुर राकेश सिंह के नाम हैं। इनके अलावा सूची में आगरा में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, शामली में नाहिद हसन, जौनपुर में नदीम जावेद, धनंजय सिंह और लाल बहादुर यादव, आजमगढ़ में रमाकांत यादव और दुर्गा प्रसाद यादव, चंदौली में मनोज कुमार सिंह उर्फ डब्बू, कानपुर नगर में सुहैल अंसारी और अजय कपूर व बलरामपुर में जगराम पासवान के नाम भी दर्ज हैं। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय लल्लू के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज और भदोही के कोईरौना थाने में तीन मामले दर्ज हैं।
इसी तरह सूची में एटा के रामेश्वर सिंह, बिजनौर के अमनमणि त्रिपाठी और ओमवती समेत अन्य, संतकबीरनगर के अलगू चौहान व लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद, देवरिया के स्वामीनाथ यादव, बाराबंकी के राम मगन रावत, सुरेश यादव उर्फ सुरेश यादव और फरीद महफूज किदवई व बस्ती के महेंद्र यादव के मुकदमे भी शामिल हैं। कुछ नाम सूची में एक से अधिक मुकदमों के साथ दर्ज हैं।
दरअसल इसी साल 22 जनवरी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कोरोना महामारी की एसओपी के उल्लंघन सहित अन्य छोटे अपराध वापस लेने के लिए राज्य सरकार को अनुमति दी थी। अब प्रदेश सरकार के विशेष सचिव डॉ. सत्यवान सिंह ने 18 जिलों के जिला प्रशासन को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। इसमें संबंधित अदालतों में मुकदमे वापसी के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल करने और उसकी रिपोर्ट शासन को भेजने को कहा गया है। इन जिलों में भदोही, फिरोजाबाद, अलीगढ़, एटा, बिजनौर, लखनऊ, सुल्तानपुर, शामली, जौनपुर, चन्दौली, आजमगढ़, संतकबीरनगर, देवरिया, बाराबंकी, आगरा, बस्ती, कानपुर नगर और बलरामपुर शामिल हैं। जनप्रतिनिधियों से जुड़े मुकदमों की वापसी के लिए न्यायालय की अनुमति की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। इसलिए शासनादेश जारी होने के साथ मुकदमे स्वत: खत्म नहीं होंगे।
न्यायालय में वाद वापस लेने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही शासन की ओर से केसों के वर्तमान स्टेटस के विषय में जो विवरण मांगा है उसे प्राथमिकता पर भेज दिया जाएगा। - प्रमोद कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व