अधिवक्ता महानप्रताप सिंह ने बताया कि थाने व एसएसपी को शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद सीजेएम न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था। सीओ राजीव द्विवेदी ने कहा कि अभी थाने पर आदेश प्राप्त नहीं है, आदेश मिलने पर नियामानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अलीगढ़ के साधू-आश्रम क्षेत्र में एक चकरोड़ पर खलाना और नारौली गांवों के बीच विवाद चला रहा है। इसमें एक पक्ष ने सीजेएम न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था, जिसमें राजस्व विभाग के अधिकारियों पर दूसरे पक्ष से मिलकर चकरोड को समाप्त करने का आरोप लगाया गया था। कोर्ट ने इस मामले में नायब तहसीलदार, कानूनगो, लेखपाल और किसानों पर रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया है।
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रामघाट रोड की पश्चिमी दिशा में ग्राम पंचायत नारौली व उखलाना की सीमाएं लगी हुई हैं, यहां नारौली, चंडौली पर ग्वालरा गांव के किसानों के खेत भी हैं। नरौली की तरफ अमित बदौतिया उर्फ आशू चौधरी, सुबोध कुमार व महान प्रताप सिंह के खेत हैं। उखलाना की तरफ ग्वालरा गांव के रामबाबू, देवेंद्र आदि के खेत हैं।
आशू चौधरी का कहना है कि दोनों गांवों की सीमा पर करीब 65 वर्ष पुराना चकरोड पड़ा था, जिसपर वर्ष 2023 में नारौली ग्राम पंचायत ने मनरेगा के तहत मिटटी डलवाई थी। रामबाबू ने अपने जमीन का रकबा कम होने की शिकायत की। साल 2024 में तत्कालीन एसडीएम ने मौके पर आकर पैमाइश कराई थी और चकरोड को सही बताया था। प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि गत 26 मई की शाम नायब तहसीलदार मोरथल प्रवीण कुमार, कानूनगो कृष्ण कुमार, लेखपाल प्रेमप्रकाश और तीन चार अन्य लेखपाल ने पैमाइश की और जेसीबी मंगवाकर चकरोड को समाप्त करा दिया। तार लगाकर रास्ता बंद कर दिया।
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इसके बाद दूसरे पक्ष के लोग पहुंचे और सुबोध व महान प्रताप के खेत में चकरोड बनाने लगे। साथ ही धमकी भी दी। अधिवक्ता महानप्रताप सिंह ने बताया कि थाने व एसएसपी को शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद सीजेएम न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था। सीओ राजीव द्विवेदी का कहना है कि अभी थाने पर आदेश प्राप्त नहीं है, आदेश मिलने पर नियामानुसार कार्रवाई की जाएगी