अलीगढ़। दीपावली के त्योहार पर खाद्य पदार्थों में मिलावट का जोर है। चमकीली दाल, चटकदार प्रतिबंधित रंगों की मिठाइयां, मसालों में लेड क्रोमेट व सूडान डाई खाद्य पदार्थों के साथ पेट में पहुंच रही हैं जो कि सौगात में कैंसर, अल्सर व पेट संबंधी घातक बीमारियां दे रही है। एफडीए की छापामारी अभी तक गति नहीं पकड़ पा रही है।
अनाज-दलहन
गेहूं का आटा : चावल की किनकी की पिसाई हो रही है।
दालें : अरहर व चना दोनों में खेसारी दाल की मिलावट।
पॉलिश : दाल चमकाने को प्रतिबंधित रंगों से पालिश होती है।
बेसन : खेसारी व मटर की दाल पिसती है।
मसाले :
लाल मिर्च : सूडान डाई से रंग चटक होता है।
हल्दी : लेड क्रोमट, चावल का आटा, मैदा में रंग मिलाकर हल्दी बिक रही है।
धनिया : हरी सूखी घास ग्राइंडर से पिस रही है।
काली मिर्च : पपीते के बीज मिलाए जा रहे हैं।
मिठाइयां --
देसी घी से बनी मिठाई : रिफाइंड के साथ एसेंस प्रयोग।
चांदी वरक : चांदी के वरक के नाम पर एल्युमीनियम वरक।
रंगीन मिठाई : चटकदार प्रतिबंधित रंगों का प्रयोग।
दूूध : स्किम्ड मिल्क,ईजी वाशिंग पाउडर,रिफाइंड और ग्लूकोज से सिंथेटक दूध बनाता है।
दूध का प्रसस्ंकरण : फारमलीन डालकर दूध कई दिन तक सुरक्षित रखा जाता है।
पनीर : इसी दूध को फाड़कर पनीर बन जाता है।
खोवा : इसी दूध से खोवा भी बन जाता है और मिठाइयां भी।
सरसों का तेल : आरजीमोन व सस्ते तेल की मिलावट।
खतरनाक नतीजे
-एक कटोरी खेसारी दाल के 30 दिन तक सेवन से लकवा मार जाता है। इसी लिए खेसारी दाल प्रतिबंधित है।
-चांदी का वरक घुलनशील है लेकिन एल्युमीनियम वरक घुलनशील नहीं है, जो आंते तक काट देता है।
-फारमोलीन का प्रयोग शवों को सुरक्षित रखने के लिए होता है, ये धीमा जहर है। मिलावटी खाद्य पदार्थों से कैंसर, अल्सर व पेट की बीमारी होती हैं।
- डा. संजय सिंघल सीनियर फिजीशियन
एफडीए ने मिलावटखोरी रोकने को एक जनवरी से अब तक खाद्य पदार्थों के 106 सेंपल भरकर जांच को भेजे। प्रयोगशाला से 44 नमूनों की जांच रिपोर्ट आई, जिनमें से 16 नमूने फेल हो गए। मिलावट के दो मामलों में सजा हो चुकी है जबकि कई मामलों में लाखों का जुर्माना हो चुका है। सूडान डाई की मिर्च में मिलावट साबित होने पर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।
-चंदन पांडेय डीओ एफडीए