अलीगढ़। डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय (आगरा विश्वविद्यालय) के 2013-14 के सत्र को लाखों छात्र-छात्रा ‘ब्लैक ईयर’ के रूप में याद करेंगे। विश्वविद्यालय की बदइंतजामी से छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। विद्यार्थी न तो प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठ पा रहे है और न ही दूसरे विश्वविद्यालयों में दाखिला ले पा रहे है। प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास वर्तमान समय में उच्च शिक्षा विभाग है। बुधवार को लखनऊ में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में उन्होंने दो सौ विश्वविद्यालयों में भारत के विश्वविद्यालयों का नाम शामिल नहीं होने पर चिंता जताई थी। प्रदेश के राज्यपाल उच्च शिक्षा की दुर्दशा पर पहले ही चिंता जता चुके है। आगरा विश्वविद्यालय की हकीकत तो सबसे दुखदायी है। देश के तमाम विश्वविद्यालयों में नए सत्र का शुभारंभ हो चुका है। यह देश का शायद एकलौता विश्वविद्यालय है जहां अभी सत्र 2013-14 की प्रयोगात्मक परीक्षाएं चल रही हैं। कई विषयों की उत्तर पुस्तिकाएं जांचने का कार्य भी पूरा नहीं हुआ है। विश्वविद्यालय की बदइंतजामी से छात्र-छात्राओं की आंखों के सामने अंधेरा पसरा है। बीए, बीएससी, एमए व एमएससी आदि का रिजल्ट नहीं निकलने के कारण अभी तक अगले सत्र में छात्र-छात्राओं का नामांकन नहीं हुआ है। कठिन परिश्रम कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र प्रवेश परीक्षाओं में नहीं बैठ पा रहे हैं। प्रतिभा होने के बावजूद दूसरे विश्वविद्यालयों में प्रवेश से वंचित रह गए।
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अब तो भगवान ही मालिक है। विवि के निर्देश पर प्रोविजनल एडमिशन हो रहे हैं। छात्र को मालूम ही नहीं है कि वह पास है या फेल। रिजल्ट नहीं आने के कारण छात्र नौकरी एवं दूसरे शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश से वंचित हो रहे हैं। पता नहीं इस विवि के छात्रों का क्या होगा। -डॉ. एके दीक्षित, प्राचार्य एसवी कालेज
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विश्वविद्यालय की बदइंतजामी से हमारी तो लाइफ ही ब्लैक हो गई है। पांच साल से प्रदेश में पीएचडी में रजिस्ट्रेशन बंद है। उच्च शिक्षा का स्तर दिनोदिन गिरता जा रहा है। मेधावी एवं प्रतिभाशाली छात्र-छात्रा मारे-मारे फिर रहे हैं। -गोपाल शर्मा, रिसर्च स्कालर
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रिजल्ट नहीं आने के कारण पीसीएस-जे में नहीं बैठ सका। एपीओ प्रवेश परीक्षा से वंचित रह गया हूं। संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में नहीं बैठ पा रहे हैं। इस विश्वविद्यालय में प्रवेश लेकर पछतावा हो रहा है। -अजमल हुसैन, एलएलबी उत्तीर्ण छात्र
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स्पष्ट हो चुका है कि स्नातक से लेकर स्नातकोत्तर तक के सत्र 2011-12 के अंक पत्र का रिकार्ड विश्वविद्यालय के पास है ही नहीं। कंप्यूटर एजेंसी का संचालक लेकर चला गया है। ऐसे में सेकेंड ईयर एवं थर्ड ईयर का रिजल्ट निकलना संभव है ही नहीं। छात्र हित में सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए। -डॉ मुकेश शर्मा, अध्यक्ष पीएचडी संघर्ष समिति
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