अलीगढ़। घोटाले के नाम पर आम जुवा पर छाया रहा एनआरएचएम फिर कहीं पुराने ढर्रे पर तो नहीं चल पड़ा है। स्थिति यह है कि स्वास्थ्य विभाग में एनआरएचएम के सात माह में चार बाबू बदल गए। संविदा स्टाफ भी देहात में नौकरी नहीं करना चाहता है। स्थिति यह है कि संविदा की डॉक्टर हो या अन्य स्टाफ, उनकी मनपसंद तैनाती के लिए आए दिन आदेश ही बदलते रहते हैं। इस सबके चलते भले ही दूरदराज की सीएचसी डॉक्टर और स्टाफ नर्स विहीन हो जाएं, लेकिन स्टाफ को खुश करने की नीति से योजना का मकसद पूरा नहीं हो रहा है, इसकी किसी को चिंता नहीं है। इन सबको लेकर एसीएमओ एनआरएचएम ने सीएमओ को पत्र लिखकर आगाह कर दिया है।
संविदा की एक आयुष महिला डॉक्टर की तैनाती तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छर्रा पर है, लेकिन सीएचसी हरदुआगंज पर काम कर रही हैं। इसके चलते छर्रा सीएचसी पर महिला डॉक्टर की सेवाएं नहीं मिल रही हैं जबकि हरदुआगंज पर दो -दो डॉक्टर हो गई हैं। यही हाल संविदा की स्टाफ नर्स का है। एक स्टाफ नर्स की तैनाती गोंडा पर है, लेकिन वह सीएचसी हरदुआगंज से जाना नहीं जाती। उसी मोह के चलते वह वह हरदुआगंज पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। इसके कारण हरदुआगंज में स्टाफ नर्सों की बहुतायत है तो गोंडा में टोटा। उधर अप्रैल से अब तक एनआरएचएम का लिपिक पद का कार्य देख रहे, चार बाबू बदल गए। चार बाबू बदल जाने से रिकार्ड का कोई धनाधोरी नहीं है। इसी सबको देखते हुए एसीएमओ डॉ. राजेंद्र वार्ष्णेय ने सीएमओ को पत्र लिखकर वस्तु स्थिति से अवगत करा दिया है।