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खूनी कोठिया मोड़ हादसा -शव की शिनाख्त-Cordination

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क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
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मडराक क्षेत्र में आगरा रोड के खूनी कोठिया मोड़ पर मंगलवार को हादसे में हुईं 12 मौतों के बाद बुधवार को मृतकों के घरों पर कोहराम मचा रहा। यहां दो शवों का अंतिम संस्कार हुआ। बाकी के शवों को पैतृक गांव ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया। वहीं 12वीं महिला की पहचान भी पोस्टमार्टम केंद्र पर पहुंचे परिजनों ने कर ली।

उसके शव को भी परिजन पोस्टमार्टम के बाद अपने साथ ले गए। इसी तरह मध्य रात मृत घोषित हुए जिला सहकारी बैंककर्मी के शव को भी पोस्टमार्टम के बाद परिजन अपने साथ ले गए। इधर, अभी इस दुर्घटना में जख्मी हुए करीब डेढ़ दर्जन लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनका इलाज चल रहा है। पुलिस प्रशासनिक स्तर से उनकी खैर-खबर रखी जा रही है और स्वास्थ्य अधिकारी लगातार अस्पतालों में डॉक्टरों के संपर्क में बने हुए हैं।
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एनएच 93 के कोठिया मोड़ पर मंगलवार दोपहर दो बसों की भिड़ंत में 4 शिक्षिकाओं सहित 12 लोगों की मौत हुई थी, जबकि दो दर्जन से अधिक यात्री घायल हुए थे। इनमें से 11 की पहचान देर रात तक हो गई थी और दस शवों का पोस्टमार्टम भी कराकर परिजनों को सौंप दिया गया था।

12वीं महिला की पहचान बुधवार को गौतमबुद्ध नगर नोएडा के कासना निवासी 45 वर्षीय शांति देवी के रूप में हुई। बुधवार को पोस्टमार्टम केंद्र आए उसके बेटे मनोज व अन्य रिश्तेदारों ने उसकी शिनाख्त की। परिजनों के अनुसार वह सोमवार को अपनी ननद सुनीता को नोएडा से छोड़ने सासनी के गांव लढ़ौता आई थीं।

वहां से वापस अपनी बहन विमलेश के पास कासिमपुर पावर हाउस जाने के लिए मंगलवार को सिटी बस में अलीगढ़ के लिए सवार हुई थीं। उसका पति मजदूरी करता है, जबकि वह तीन बेटे व दो बेटियों की मां थी। पोस्टमार्टम के बाद उसके शव को परिजन अपने साथ नोएडा ले गए।

देर रात एक बजे मृत घोषित हुए 45 वर्षीय नागेंद्र पुत्र बैजनाथ निवासी धनीपुर के विषय में परिजनों ने बताया कि वह हाथरस के पुरदिलनगर में जिला सहकारी बैंक में कार्यरत थे। इन दिनों बर्खास्त चल रहे थे और मंगलवार को बैंक की तारीख के सिलसिले में हाथरस गए थे।

वहां से वापसी में अलीगढ़ लौट रहे थे। इनके तीन बेटे व पत्नी यहां साथ रहते थे। यह मूल रूप से इलाहाबाद के कौशांबी के गांव ऊना के रहने वाले थे। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद नागेंद्र के शव को परिजन अपने साथ देर रात इलाहाबाद ले गए।

अंतिम संस्कार के वक्त यह था चार परिवारों के हालात
एक्सीडेंट में मृत मैलरोज बाईपास की न्यू बैंक कालोनी निवासी मोनिका की सुधीर कुमार से चार महीने पहले ही शादी हुई थी। पति सुधीर बुलंदशहर के पंड्रावल के एक इंस्टीट्यूट में बतौर शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि मोनिका सासनी ब्लाक के नगला रत्ना में शिक्षिका थीं। उनके शव का नुमाइश मैदान शमशान गृह में अंतिम संस्कार किया गया। इसी तरह बन्नादेवी के नवीन नगर खैर बाईपास रोड स्थित अंजली पत्नी शिवकुमार के दो बच्चे हैं।

इनकी शादी 2008 में हुई थी। बड़ा बेटा प्रतीक तथा बेटी निकिता का रो-रोकर बुरा हाल था। इनके शव का पैतृक गांव खेड़ा खुशखबर में अंतिम संस्कार किया गया। इनके पति शिवकुमार एटा में बतौर शिक्षक कार्यरत हैं। बारात की बस में मारे गए जीवनगढ़ निवासी अब्दुल वाहिद पुत्र समद खां ने अपने पीछे पांच लड़कियां और चार लड़कों को रोते बिलखते छोड़ा है। अब्दुल मजदूरी कर परिवार को पालते थे। उनके जाने से परिवार में आर्थिक संकट गहरा गया है।

उनके शव को भी शमशान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। इसी तरह हादसे की चौथी मृतक शिक्षिका गीता का उनके पति राजेश ने अपने पैतृक गांव सिकंदराराऊ के गांव लिहा वाजिदपुर में अंतिम संस्कार किया। गीता ने अपने दो छोटे-छोटे बच्चों को अपने पीछे छोड़ा है।
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पिता को मिट्टी देकर फिर भर्ती हो गया साजिद
अब्दुल वाहिद व उनका बेटा साजिद दोनों मंगलवार को बारात वाली बस में सफर कर रहे थे। हादसे से अब्दुल वाहिद की मौत हो गई, जबकि बेटा साजिद गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके सीने में गंभीर चोट तथा पैर में फ्रैक्चर है। बुधवार को जब अब्दुल को मिट्टी दी गई तो इस दौरान साजिद मेडिकल से छुट्टी लेकर पहुंचा और अपने पिता को मिट्टी देने के बाद वापस मेडिकल कालेज में भर्ती हो गया।
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