न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
प्रख्यात गीतकार गोपालदास नीरज ने भी दधीचि की तरह मानवता की कल्याण के लिए देहदान कर दिया था। अफसोस की बात यह रही कि नीरज की देहदान की इच्छा पूरी नहीं हो सकी। शरीर में इंफेक्शन के कारण परिजनों ने अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया।
नीरज ने अंतरात्मा की आवाज पर देहदान से संबंधित सहमति पत्र अक्तूबर 2015 में किया था। मरणोपरांत पार्थिव शरीर को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के छात्रों एवं शिक्षकों को पठन-पाठन एवं शोध के लिए समर्पित करने की इच्छा व्यक्त की थी।
नई दिल्ली के एम्स में उनके निधन के बाद जेएन मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग में तैयारी भी शुरू कर दी गई थी। लेकिन अंतिम समय में देहदान से संबंधित निर्णय पलट दिया गया।
बताया गया कि शरीर में इंफेक्शन के कारण अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया गया है। जेएन मेडिकल कॉलेज के एनटॉमी विभाग के चेयरमैन प्रो. नफीस अहमद फारूकी ने बताया कि उनके पास एक फोन आया था, जिसमें बताया गया कि नीरज का अंतिम संस्कार किया जाएगा।