लड़कियां बटोर रहीं गोल्ड मेडल, लड़के आरक्षण न मांगने लगें
ब्यूरो,अमर उजाला, अलीगढ़।
राज्यपाल ने महिला सशक्तीकरण की वकालत की और कहा कि अब रक्षा मंत्री भी एक महिला हैं। लड़के सावधान हो जाएं। जिस तरह लड़कियां शैक्षिक संस्थानों, खेल के मैदानों और अन्य क्षेत्रों में गोल्ड मेडल बटोर रही हैं, उससे कहीं ऐसा न हो कि लड़के आरक्षण मांगने लगें।
राज्यपाल ने कहा कि 1954 में जब वह पुणे के कालेज में पढ़ते थे, तो उनकी कक्षा में मात्र चार लड़कियां थीं, 146 लड़के थे। लेकिन अब वह प्रदेश की 29 यूनिवर्सिटियों के कुलाधिपति हैं।
वह जिस शिक्षण संस्था में जाते हैं, तो देखते हैं कि वहां 45 से 50 फीसदी तक छात्राएं हैं। दीक्षांत समारोह या वार्षिक समारोह में देखते हैं कि गोल्ड मेडल हासिल करने वालों में 65 फीसदी छात्राएं हैं। जिस प्रकार यह दर बढ़ रही है, उसे देखते हुए लड़के यह न कहने लगें कि हमें आरक्षण चाहिए। राज्यपाल की इस बात पर सभागार में ठहाके गूंजने लगे।
उन्होंने कहा कि पहले सेना में महिलाओं की भूमिका नर्सिंग और चिकित्सा के क्षेत्र तक ही सीमित थी। लेकिन अब वह अर्धसैनिक बलों में, पुलिस में, सेना में अपनी भूमिका निभा रही हैं। अब सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि उन्हें फाइटर प्लेन उड़ाने देना है और थल सेना में युद्ध के मोर्चे पर भेजना है।
काश में डीएस कालेज में पढ़ा होता: राज्यपाल
राज्यपाल को डीएस कालेज बेहद पसंद आया। उन्होंने कहा कि देखकर ईर्ष्या हो रही है। काश वह भी यहां पढ़े होते। यहां का शानदार मैदान, इमारत, खूबसूरत सभागार बहुत अच्छा है। यही बात पहली बार कालेज परिसर में आए एटा के सांसद राजवीर सिंह राजू ने कही। उन्होंने कहा कि वह बाहर से ही देखते थे कि डीएस कालेज का गेट है। इस कालेज में उनके पिता पढ़े हैं। लेकिन आज पहली बार अंदर आकर देखा, तो आंखें फटी की फटी रह गईं।
छह अगस्त को आना था...
राज्यपाल ने कहा कि उन्हें यहां छह अगस्त को आना था। इससे पहले ही पीएमओ से संदेश आया कि म्यांमार जाना है। वहां हिंदू धर्म और बुद्धिस्ट विचारधारा पर संयुक्त अधिवेशन होना था, जिसके उद्घाटन समारोह में उन्हें शामिल होना है।
इस कार्यक्रम को भारत की ‘लुक ईस्ट’ नीति के अंतर्गत आयोजित किया गया था। इसमें 30 देशों के 150 प्रतिनिधि शामिल हुए। जब वह म्यांमार गए तो वहां बहादुर शाह जफर की मजार पर भी गए। साथ ही बाल गंगाधर तिलक को जहां कैद किया गया, उस मंडले गांव की जेल जाना चाहते थे। लेकिन बताया गया कि वह जेल अब गिरा दी गई है। तिलक ने यहीं पर गीता रहस्य पुस्तक लिखी थी।