सीवेज ट्रीटमेंट न लगाने पर एनजीटी के आदेश पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने स्वर्ण जयंती नगर स्थित रामा सुधा अपार्टमेंट के बिल्डर पर 90 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह अलीगढ़ के इतिहास में सबसे बड़ा जुर्माना बताया जा रहा है। बिल्डर को 15 दिन के अंदर जुर्माने का भुगतान करने के आदेश दिए गए हैं।
शिकायतकर्ता विभोर मित्तल ने 14 अगस्त 2020 को उन्नति कंस्ट्रक्शन के बिल्डर के खिलाफ शिकायत की थी। उनका आरोप है कि उन्नति कंस्ट्रक्शन के बिल्डर द्वारा बनाए गए रामासुधा अपार्टमेंट में 65 फ्लैट हैं, लेकिन जल मल का शोधन यंत्र नहीं लगाया। मामले की जांच प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों ने की और अपनी रिपोर्ट मुख्यालय को सौंप दी। इस मामले में बिल्डर को नोटिस जारी हो गया। नोटिस के बाद रामासुधा अपार्टमेंट में एसटीपी प्लांट तो लग गया, लेकिन राज्य बोर्ड से जल प्रदूषण निवारण व वायु प्रदूषण नियंत्रण की सहमति नहीं ली गई।
इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल से शिकायत की गई। एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट को आधार मानते हुए बिल्डर व अपार्टमेंट संचालक के खिलाफ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का मामला आरोपित करने के निर्देश दिए। एनजीटी के आदेश पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य पर्यावरण अधिकारी आरके सिंह ने बिल्डर पर 90 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी रामगोपाल ने बताया कि जल मल शोधन संयंत्र न लगाने के मामले में एनजीटी के आदेश पर रामासुधा अपार्टमेंट के बिल्डर उन्नति कंस्ट्रक्शन पर 90 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।