न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
आजादी के बाद से लेकर वर्ष 2014 तक के चुनाव में अलीगढ़ संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व सात बार महिलाओं द्वारा किया गया है। लेकिन जनपद की महिलाएं सांसद एवं विधायक बनने के लिए तरस गई हैं। लोकसभा चुनाव में किसी भी दल द्वारा अभी तक महिला प्रत्याशी को आगे नहीं किये जाने से क्षोभ है।
वर्ष 1980 में जनता पार्टी एस की इंद्रा कुमारी सांसद निर्वाचित हुई थी। 1984 में कांग्रेस की उषा रानी तोमर निर्वाचित हुई। 1991, 1996, 1998 और 1999 में लगातार चार बार भाजपा की शीला गौतम निर्वाचित हुई और संसद में अलीगढ़ का प्रतिनिधित्व की।
2009 में बसपा की राजकुमारी चौहान निर्वाचित हुई। रामसखी कठेरिया और ज्ञानवती विधायक बनी थी। भाजपा की सावित्री वार्ष्णेय एवं शकुंतला भारती मेयर पद को सुशोभित कर चुकी हैं।
यहीं नहीं जिले की राजनीति में रामसखी कठेरिया एवं डॉ. उमेश कुमारी शीर्ष पर पहुंची और जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गई। भाजपा द्वारा महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की वकालत की जाती है। लेकिन जनपद के हिसाब से देखे तो विधान सभा एवं लोकसभा चुनाव में महिलाएं उपेक्षित नजर आ रही है। उनका आक्रोश सोशल मीडिया में भी दिखाई दे रहा है।
भाजपा द्वारा 33 प्रतिशत आरक्षण की बात की जाती है। लेकिन जिले में इसका ध्यान नहीं रखा जाता। विधान सभा चुनाव के दौरान महिलाओं का ध्यान नहीं रखा गया। नरेंद्र मोदी से महिलाओं को बहुत आशा है। - मधु आंधीवाल, पूर्व नगर निगम पार्षद
जिले के सभी सातों विधानसभा पर पुरुषों का कब्जा है। लोकसभा चुनाव पर तो महिला का हक बनता है। पार्टी नेतृत्व को चाहिए कि इस पर ध्यान दें। महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए यह जरूरी है। - अनिता जैन, महिला व्यवसायी
अलीगढ़ लोकसभा सीट गठबंधन में है। यह बसपा की खाते में गई है। इसलिए टिकट का फैसला बसपा के स्तर से किया गया है। - सना खान, महानगर अध्यक्ष सपा महिला मोर्चा
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती स्वयं महिला है। बसपा से ज्यादा महिलाओं का सम्मान कहीं नहीं है। बसपा के टिकट पर ही राजकुमारी चौहान निर्वाचित होकर संसद पहुंची थी। - तिलकराज यादव, जिलाध्यक्ष बसपा