योगी राज आने पर नहीं बदली खेलों की सूरत
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
सूबे में योगी राज आने पर भी खेलों की सूरत नहीं बदली है। इससे उम्मीदों को झटका लगा है। यह दर्द गोरखपुर के खिलाड़ियों में छलका है। वह पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मशताब्दी के उपलक्ष्य में हो रही सीनियर राज्य स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आए हैं।
हालांकि, उनकी टीम की जीत का सफर थम गय है। खेल सुविधाओं से लेकर भविष्य की योजनाओं के बारे में खिलाड़ियों व रेफरी से अमर उजाला ने बातचीत की।
खिलाड़ियों की बेबाक राय
गोरखपुर के खिलाड़ी अवनीश यादव का कहना है कि जालंधर में संतोष ट्रॉफी खेल चुका हूं। उन्होंने कहा कि योगी राज आने के बाद खेलों में कोई गुणात्मक सुधार नहीं हो सका है। उम्मीद थी कि खेलों का ग्राफ बढ़ेगा, सुविधाएं बढ़ेंगी, पर ऐसा अब तक नहीं हो सका है।
गाजीपुर के रेफरी मोहम्मद इफ्तिखार का मानना है कि फुटबॉल का क्रेज बढ़ाने के लिए सबको खासतौर स्कूलों को आगे आना चाहिए। इसे खेल की नर्सरी कहा जाता है। अगर खिलाड़ियों को यहां तैयार कर लिया गया तो आगे चलकर खिलाड़ियों की कमी से जूझना नहीं पड़ेगा।
पडरौना के रेफरी खुर्शीद अहमद का कहना है कि फीफा वर्ल्ड कप के भारत में आयोजन से फुटबॉल के प्रति लोगों की दीवानगी बढ़ेगी। निश्चित ही यह फुटबॉल के लिए शुभ संकेत है। मैदान पर अन्य खेल के खिलाड़ियों की तरह भारी तादाद में फुटबॉल के खिलाड़ी किक मारते नजर आएंगे।