मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दिवाकर त्रिपाठी मंगलवार को ब्लॉक क्षेत्र में संचालित चार गोशालाओं का निरीक्षण करने पहुंचे। गंगेई में प्रधान के प्रतिनिधि सुरेश सिंह ने सीधा सवाल किया - गोशाला में 80 गोवंश हैं लेकिन तीन माह से 50 गोवंश का ही पैसा मिल रहा है। अन्य 30 गोवंश को भूसा-चूनी कहां से खिलाऊं? अपने पैसे से इतने गोवंश कब तक और कैसे पालूं?
अमृतपुर गांव के प्रधान प्रतिनिधि जितेंद्र कुमार का भी कहना है कि उनके यहां गोशाला में 90 गोवंश हैं, लेकिन 60 गोवंश के लिए ही विभाग से पैसा मिल रहा है। ऊपर से सीवीओ कहकर गए हैं कि सभी गोवंश को भूसा-चूनी, हरा चारा के साथ सैलेज (मक्का के भुट्टे से तैयार पदार्थ) बढ़ाकर गोवंश को दिया जाए। कहा कि इसके लिए अतिरिक्त धन की व्यवस्था कैसे करूं?
चंडौस ब्लॉक में संचालित 24 गोशालाएं बंद किए जाने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। गोवंश की संख्या 50 से कम होने पर विभाग ने बंद इन गोशालाओं को बंद किया है, जबकि वर्ष 2019 में ही 4.50 लाख से 10 लाख रुपये तक ग्राम पंचायतों से खर्च कराकर इन गोशालाओं को बनवाया गया था। ये गोशालाएं अब बदहाल हैं।
ऊमरी की नगला जैत गाेशाला में 221 गोवंश थे। यहां लड़ामनी टूटी थीं, जिन्हें सही कराने के साथ गोवंश को प्रतिदिन हरा चारा और 70 किलोग्राम भूसा खिलाने के लिए सीवीओ ने कहा। नगर पंचायत की गोशाला का भी उन्होंने निरीक्षण किया। नगर पंचायत की ईओ रेनू यादव, पशु चिकित्सा अधिकारी चंडौस डॉ. ललित कुमार, सचिव रीना चौधरी, प्रधान प्रतिनिधि सरवन बघेल, जितेंद्र कुमार मौजूद रहे।
ओगीपुर की पूर्व प्रधान ने जताई गोशाला संचालन की इच्छा
ग्राम पंचायत ओगीपुर की पूर्व प्रधान स्नेहलता चौहान ने अपने पति रामनिवास चौहान सहित कुछ ग्रामीणों के साथ सीवीओ डॉ. दिवाकर त्रिपाठी से मुलाकात की। इन सभी ने गांव ओगीपुर में बंद गोशाला के संचालन की इच्छा जाहिर की। पूर्व प्रधान के अनुसार उनके कार्यकाल में आठ से दस लाख रुपये खर्च कर गोशाला का निर्माण कराया गया था। 50 से कम गोवंश होने पर विभाग ने गोशाला बंद का यहां के गोवंश को दूसरी गोशालाओं में भेज दिया। कहा कि अनुमति मिले तो गांव में गोशाला संचालित की जा सकती है।