ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
अलीगढ़। हत्यारोपी के जेल रहकर बिना पेपर दिए पास होने के प्रकरण में अब माध्यमिक शिक्षा विभाग में भी खलबली है। एडीआईओएस ने इस मामले में केंद्र व्यवस्थापक से सारे रिकॉर्ड तलब किए हैं। एडीआईओएस का कहना है कि वह सोेमवार को इस मामले की जांच करेंगे। वहीं, केंद्र व्यवस्थापक स्तर पर मसला मैनेज करने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।
यूपी बोर्ड की परीक्षा का यह सनसनीखेज इस समय सुर्खियों में है। खैर क्षेत्र के गांव सोफा निवासी गवेश कुमार पुत्र वीरेंद्र सिंह ने पिछले साल सौरेला जट्टारी के इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट का फॉर्म भरा था।
19 अप्रैल को होने वाले अंग्रेजी द्वितीय के प्रश्नपत्र से पहले यानी 16 अप्रैल को नोएडा की कासना थाना पुलिस ने उसे पिसावा के गांव दीवा निवासी कल्यान पुत्र निरंजन की हत्या के मुकदमे में गिरफ्तार कर लिया था। 17 अप्रैल को उसे जेल भेज दिया था। यह हत्या एक जनवरी को कासना क्षेत्र में हुई थी। जब नौ जून को यूपी बोर्ड का रिजल्ट आया तो यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि जिस प्रश्नपत्र के दौरान गवेश जेल में था, उस अंग्रेजी के पेपर में उसे 50 में से 24 नंबर मिल गए।
इसका अमर उजाला ने खुलासा किया तो प्रशासन के साथ-साथ अब माध्यमिक शिक्षा विभाग में खलबली मची हुई है। एडीआईओएस डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय ने बताया कि उन्होंने केंद्र व्यवस्थापक से बात की तो केंद्र व्यवस्थापक ने बताया है कि जिस दिन गवेश जेल में था, उस दिन वह परीक्षा में भी गैरहाजिर था। डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय ने बताया कि उन्होंने उन्होंने इस प्रकरण में केंद्र के सारे रिकॉर्ड तलब किए हैं और वह सोमवार को इस मामले की जांच करेंगे।