राजा तिवारी, अमर उजाला, अलीगढ़।
हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के सत्र 2018-19 शुरू होने से लेकर अब यूपी बोर्ड परीक्षा देते समय जिले के डाटा में 16148 परीक्षार्थियों के डाटा में अंतर आ गया है। यह अंतर कैसे आया, इस संबंध में अधिकारी भी जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। पर जानकारों की माने तो इस अंतर की बड़ी वजह आधारकार्ड मानी जा रही है।
क्योंकि प्रतिवर्ष फर्जी छात्रों के पंजीकरण को देखते हुए शासन ने सत्र की शुरुआत में पंजीकरण के बाद आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया था। ऐसे में दो जिले में पंजीकरण कराने वाले परीक्षार्थी रडार पर आ जाते। इस कारण परीक्षार्थियों ने पंजीकरण तो कराया, लेकिन आधार कार्ड जमा नहीं किया। इस कारण परीक्षा की शुरुआत में फर्जी छात्रों का पंजीकरण डाटा डिलीट हो गया है।
बता दें कि जब सत्र शुरू हुआ था तो जिले में 125577 विद्यार्थी पंजीकृत हुए थे। इसके बाद शासन ने इन सभी परीक्षार्थियों का डाटा आधारकार्ड सहित मांगा था। इसके बाद सभी कार्यवाहियां होने के बाद अब यूपी बोर्ड परीक्षा शुरू हो गई हैं। ऐसे में जब मंगलवार को हिंदी की परीक्षा हुई तो पता चला कि जिले में सिर्फ 109429 परीक्षार्थी परीक्षा दे रहे हैं। जबकि पंजीकरण से लेकर परीक्षा देने तक इस डाटा में 16148 परीक्षार्थियों के डाटा का अंतर आया है।
इस संबंध में डीआईओएस डॉ. धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि पंजीकरण के बाद बोर्ड सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को संशोधन लिस्ट जारी करता है। इसी के साथ प्रधानाचार्यों को विद्यार्थियों के दस्तावेज सही नहीं पाए जाने पर डाटा डिलीट करने का अधिकार भी देता है। इसे प्रधानाचार्य बोर्ड की वेबसाइट पर स्वयं अपने लाग इन आई, पासवर्ड का प्रयोग करके डाटा अपलोड करते हैं तथा संशोधन करते हैं।
डाटा का सारा कार्य विद्यालय स्तर पर ही किया जाता है। यह कार्य जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से नहीं होता है। संभवत: हो सकता है कि संशोधन के समय यह डाटा डिलीट हुआ हो।