आशीष निगम, अलीगढ़।
कोराना से जान गंवाने वालों के अंतिम संस्कार के लिए प्रदेश में जो व्यवस्था हुई है, वह भी नियम और शर्तों पर आधारित है। निराश्रित और अज्ञात कोरोना संक्रमित या कोरोना संदिग्ध व्यक्ति की मौत होती है, तो सरकार उसके अंतिम संस्कार के लिए पांच हजार रुपये तक खर्च करेगी।
अगर मरने वाला थोड़ा भी सक्षम है तो शव उसको सौंप दिया जाएगा। वो जैसे चाहे अंतिम संस्कार करे। इस अंतिम संस्कार में अगर कहीं कोई संक्रमण भी फैल रहा हो तो वो भी किसी की बला से। जी हां, ऐसा ही कुछ हो रहा है।
कोविड डेडीकेटेड श्मशान गृहों और कब्रिस्तान में पहुंचने वाले शवों के साथ शासन की नियम और शर्ते लागू हैं। अगर मृतक के परिजन सक्षम हैं तो वह अपने तरीकों से संस्कार कराएंगे और अगर मरने वाला लावारिस है, या उसके आश्रित सक्षम नहीं हैं तो सरकार व्यवस्था कराएगी।
नुमाइश मैदान स्थित मुक्तिधाम श्मशान ग़ृह और शाहजमाल स्थित शम्सुलआरफीन कब्रिस्तान को कोविड डेडीकेटेड घोषित किया गया है। दोनों स्थानों पर अभी तक एक भी शव के वास्ते कोई आर्थिक मदद नहीं पहुंची। बीती 13 मई को सीएम योगी जब अलीगढ़ दौरे पर थे, उसी वक्त नगर निगम के अधिकारी मुक्ति धाम पहुंचे और वहां कोने में 600 किलो लकड़ी गिरवा दी। कहा कि अंतिम संस्कार के लिए भेजी गई है।
वहां के प्रबंधन ने इस लकड़ी का अब तक प्रयोग नहीं किया है। उन्होंने निगम के अधिकारियों से ये भी कहा कि इस लकड़ी को वो वापस ले जाएं। इससे किसी का कोई भला नहीं होने वाला है। मुक्तिधाम में पहली अप्रैल से 22 मई के बीच 500 से अधिक कोरोना संक्रमित या संदिग्धों का अंतिम संस्कार हुआ है।
जिसमें अधिकांश मामलों में खुद पीड़ित परिजनों ने ही पूरा खर्च उठाया है। कुछ के परिजन असहाय भी थे, लेकिन उनको मौके पर कोई मदद नहीं मिली। मुक्तिधाम के प्रमुख लोगों ने बताया कि जहां भी जरूरत होती है वहां मानव उपकार संस्था ही मदद कर रही है।
अगर किसी के पास पैसा या दूसरे संसाधन नहीं हैं तो भी संस्था मदद कर रही है। नगर निगम प्रशासन का सहयोग न के बराबर ही है। कमोबेश यही हाल शम्सुलआरफीन कब्रिस्तान का है। जहां कई लोगों के शवों को आपस में चंदा कर दफनाया गया। उनको भी प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली।
इतनी महंगाई में शव जलाने का खर्च 400
रेलवे ट्रैक और उसके आसपास से लगती जीआरपी थाना क्षेत्र की सीमा से इस वर्ष 21 मई तक तीन अज्ञात शव नुमाइश मैदान स्थित मुक्तिधाम श्मशान गृह पहुंचे। जिनका अंतिम संस्कार कराया गया। बीते सवा चार साल में जीआरपी के माध्यम से 210 शवों का अंतिम संस्कार कराया गया है।
जीआरपी को प्रति व्यक्ति अंतिम संस्कार का खर्च लगभग चार हजार रुपये मिलता है, लेकिन मुक्तिधाम को इस धनराशि से केवल 400 रुपये मिलते हैं। बाकी 3600 रुपये का खर्च जीआरपी खुद करती है। यहां जीआरपी और मुक्तिधाम के प्रबंधन के बयान भी विरोधाभासी हैं। जीआरपी दावा करती है कि अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था वह खुद करती है। वहीं मुक्तिधाम वाले दावा करते हैं कि वह 400 रुपये में ही शवों का संस्कार कर देते हैं।
- राज्य सरकार की ओर से अज्ञात निराश्रित और बेसहारा शवाें के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए पांच हजार रुपये की व्यवस्था की गई है। संबंधित निकाय इसका खर्च वहन करेंगे।
- अंकित खंडेलवाल, सीडीओ
- दो नगर पालिकाओं में ऐसे अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार संबंधित निकायों की मदद से कराया गया है। शहरी क्षेत्र में इसकी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की है। उनको ही मदद करनी है।
-डीपी पॉल, एडीएम प्रशासन
- जीआरपी कार्यक्षेत्र सीमा में मिलने वाले अज्ञात शवों को एंबुलेंस से नुमाइश मैदान स्थित श्मशान गृह में पहुंचाया जाता है। उसका सारा सामान खरीद कर संस्कार कराया जाता है। पुलिस कर्मी अपनी मौजूदगी में संस्कार कराते हैं। 400 रुपये श्मशान गृह के खर्च के लिए दिए जाते हैं, जो वहां पर दिए जाते हैं।
-यशपाल सिंह, इंस्पेक्टर जीआरपी
अप्रैल से 22 मई तक लगभग 500 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार हुआ है। सीएम योगी के आने पर नगर निगम के अधिकारी 600 किलो लकड़ी लेकर आए थे। जिसका अभी तक प्रयोग नहीं हुआ है। किसी भी शव के संस्कार के लिए एक भी रुपया नहीं दिया गया है। इसी तरह से जीआरपी के माध्यम से आने वाले अज्ञात शवों के लिए भी मात्र 400 रुपये प्रति शव का भुगतान होता है। जिसमें अंतिम संस्कार नहीं हो सकता है।
-विष्णु कुमार बंटी, मानव उपकार संस्था