कोविड 19 के संक्रमण से जान गंवाने वालों का अंतिम संस्कार नुमाइश मैदान स्थित शमशान गृह में हो रहा है। यहां पर कोविड 19 के प्रोटोकाल के तहत पीपीई किट पहन कर अंतिम संस्कार कराया जाता है। जान गंवाने वाले वो लोग, जिनकी कोरोना रिपोर्ट मौत होने तक पुष्ट नहीं हो रही है, उनका भी अंतिम संस्कार भी यहीं हो रहा है।
बीती छह अप्रैल से 24 अप्रैल की शाम तक यहां 59 लोगों का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकाल के तहत किया गया। 6 अप्रैल को एक, 7 अप्रैल को दो, 9 अप्रैल को एक, 10 अप्रैल को दो, 14 अप्रैल को एक, 16 अप्रैल को छह, 17 अप्रैल को 5, 19 अप्रैल को 5, 20 अप्रैल को 9, 21 अप्रैल को 11, 22 अप्रैल को 14, 23 अप्रैल को 10 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। शवों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 16 प्लेटफार्म को बढ़ा कर 24 कर दिया है। इन प्लेटफार्मों पर ही चिता रखी जाती है। जगह कम होने के कारण ये प्लेटफार्म कुछ आड़े तिरछे किए गए हैं। जिससे निकलने का रास्ता बना रहे और अर्थी लाने में दिक्कत न हो।
कोरोना से जान गंवाने वाले सभी मरीजों के शव नुमाइश मैदान में नहीं आ रहे हैं, जो आ रहे हैं, उनका अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किया जा रहा है। कई लोग ऐसे भी हैं, जिनके मरीजों की कोरोना रिपोर्ट मृत्यु के बाद भी नहीं मिल रही है। ऐसे लोग अपने परिजनों का शव अपने गांव ले जाते हैं। वहीं उनका अंतिम संस्कार करते हैं।
- विष्णु कुमार बंटी, संस्थापक अध्यक्ष मानव उपकार संस्था।