महाशिवरात्रि को लेकर जिला प्रशासन ने शहर के अंदर भारी वाहनों और रोडवेज बसों को प्रतिबंधित रखा था, जिसका फायदा सोमवार को टेंपो व ई-रिक्शा चालकों ने उठाया। थोड़ी-थोड़ी दूरी का सफर तय करने के लिए लोगों ने 50-50 रुपये तक चुकाए। जबकि वाहन न मिलने पर लोगों ने पैदल ही सफर किया।
महाशिवरात्रि पर कांवड़ लाने के लिए सुबह से ही शहरवासी गंगाघाट के लिए रवाना होने लगे। सुबह 11 बजे तक तो वाहनों की किल्लत हो गई। शहर के अंदर भारी वाहन व रोडवेज बसें प्रतिबंधित हैं। इस वजह से सिर्फ टेंपो और ई-रिक्शा चलने दिए गए। थके हारे कांवड़िए हो या किसी काम से शहर में घूम रहे लोगों को टेंपो और ई-रिक्शा नहीं मिले, क्योंकि कई टेंपो तो गंगाघाट के लिए बुक होकर जा चुके थे। दो-एक टेंपो शहर में चल रहे हैं। वाहन न होने की स्थिति में ई-रिक्शा चालकों ने मनमाना किराया वसूला। सासनीगेट से मदारगेट तक के लिए लोगों ने 50-50 रुपये चुकाए। थोड़ी दूरी का सफर 100 से 200 रुपये में तय कराया गया। शहर के अंदर काम करने वाले जो लोग अन्य जनपद या गांव से आते हैं। उन्हें पहुंचने में भी घंटों का समय लगा।