जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में शनिवार को जिला मुख्यालय एवं तहसील स्तर पर आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 5449 मामलों में से 4161 मामलों का निस्तारण हो गया। इससे सेटलमेंट के रूप में तीन करोड़ 81 लाख 28 हजार 675 रुपये मिले। प्री लिटिगेशन के 18777 में से 12252 मामलों का निस्तारण कराकर 5 करोड़ 71 लाख 83 हजार 421 रुपये वसूल किए गए। यही नहीं जिला न्यायाधीश नवीन श्रीवास्तव ने मोटर दुर्घटना प्रतिकर के 13 मामलों का निस्तारण कराकर 87 लाख 74 हजार रुपये पीड़ित परिवारों को दिलाए गए। परिवार न्यायालय द्वारा सुलह समझौते से 23 जोड़ों को साथ-साथ घर भेजा। इनमें सर्वाधिक मामले प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय शाहिद रजा ने निपटाए। सर्वाधिक 1066 मामलों का निस्तारण मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट करुणा सिंह ने किया।
इससे पूर्व राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नवीन श्रीवास्तव ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। जिला जज ने कहा कि हम सभी 1987 से न्यायपालिका के बोझ को लोक अदालत के माध्यम से कम करने के लिए प्रयासरत हैं। लोक अदालत आसान और त्वरित न्याय का माध्यम है। जबकि न्यायालय में मामलों के निस्तारण की एक जटिल प्रक्रिया है। नोडल अधिकारी व अपर जिला जज प्रथम संतोष कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि लोक अदालत को सफल बनाने के लिए हमें तन्मयता से कार्य करना है, ताकि वंचित को समय पर न्याय मिल सके। प्राधिकरण सचिव तूलिका बंधु ने कहा कि गत वर्षों से आये आंकड़े कहते हैं कि प्राधिकरण ने निर्धन को न्याय का जो सपना देखा था वह पूरा हो रहा है। इस अवसर पर सभी न्यायिक अधिकारी, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश गुप्ता, महासचिव अनूप कौशिक, सोहन लाल, उपेंद्र मिश्रा, मनोज, नितिन अग्रवाल, ऋषि, दिनेश, राहुल, बृजेश, वीरेंद्र स्वरूप माथुर, नरसिंह आदि उपस्थित रहे।
14 साल बाद इगलास के मोहन सिंह को स्थायी लोक अदालत से मिला न्याय
स्थायी लोक अदालत से शनिवार को गांव इकताजपुर इगलास के किसान मोहन सिंह को 14 साल के संघर्ष के बाद आखिरकार न्याय मिल ही गया। उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्ष 1988 में विद्युत विभाग से नलकूप के लिए पांच हार्स पावर का कनेक्शन लिया था। वर्ष 2005 से विद्युत विभाग से साढ़े सात हार्स पावर की बिलिंग शुरू हो गई। जबकि न उन्होंने कोई प्रोसेसिंग चार्ज दिया था और न ही भार बढ़वाने की कोई अर्जी। नवंबर 2005 से उन्होंने शिकायत करनी शुरू की और विद्युत नियामक आयोग से लेकर प्रबंध निदेशक तक शिकायत की, लेकिन सरचार्ज व बिल लगातार आता रहा। इसके बाद उन्होंने एक्सईएन प्रथम लाल डिग्गी, एक्सईएन तृतीय लाल डिग्गी एवं एक्सईएन तृतीय इगलास को पार्टी बनाकर स्थायी लोक अदालत में मामला डाल दिया। शनिवार को प्रभारी अध्यक्ष शजिया सिद्दीकी एवं सदस्य मीना बंसल की देखरेख में हुए निर्णय में उनका कनेक्शन पांच हार्स पावर का मानते हुए सरचार्ज आदि माफ कर दिया गया।