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अलीगढ़ में कानून के खौफ से छात्रा ने मांगी माफी

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कानून के खौफ से छात्रा ने मांगी माफी
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।

महानगर के नामचीन स्कूल की पूर्व शिक्षिका का फोटो मार्फ कर फेसबुक मैसेंजर के जरिये उसके पति को भेजने के मामले में पुलिस आरोपी छात्रा तक पहुंच गई है। यह छात्रा शहर के एक बड़े घराने की बेटी है। पुलिस दरवाजे पर पहुंचने पर छात्रा का परिवार भी शर्मशार है और बेटी की ओर से लिखित माफी मांगी जा रही है।

माफी शब्द सामने आते ही दोनों परिवारों में बात खत्म करने पर सहमति बन गई है। मगर यह लिखित माफी स्कूल तक पहुंचाई जाएगी ताकि स्कूल में उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके।
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वाकया पिछले सप्ताह पुलिस के पास पहुंचा था। महानगर के एक स्कूल की शिक्षिका की एक साल पहले शादी हो चुकी है। अब पिछले पखवाड़े उसके पति के फेसबुक मैसेंजर पर उसकी पत्नी का आपत्तिजनक फोटो मार्फ सॉफ्टवेयर की मदद से किसी के साथ जोड़कर भेजा गया और उस पर भद्दे कमेंट किए गए।

चूंकि यह हरकत एक मर्तबा शिक्षिका के साथ स्कूल में नौकरी के दौरान भी हुई थी। उस समय भी कुछ छात्राओं के चेहरे उजागर हुए थे। इसलिए टीचर का शक उन्हीं पर गया। मगर इस बार फर्जी फेसबुक आईडी यूज की गई थी।

इस मामले में एसएसपी से लिखित शिकायत पर सर्विलांस की मदद से जांच कराए जाने पर आरोपी छात्रा तक पुलिस पहुंच गई। छात्रा शहर के बड़े घराने से ताल्लुक रखती है। छात्रा के परिजनों ने अपनी बेटी की हरकत पर खेद जताते हुए लिखित में परिवार से माफी मांगने व गलती स्वीकारने की बात कही है। दोनों परिवारों का आमना सामना भी हो गया है। छात्रा ने भी अपनी गलती स्वीकारी है।

-इस मामले में छात्रा को चिह्नित कर लिया गया और परिवार से बात की गई है। चूंकि छात्रा के खिलाफ तहरीर है, इसलिए परिजनों ने मामले में माफी व गलती स्वीकारने की बात कही है। बेशक गलती व माफी स्वीकारने की बात है। मगर कम से कम छात्रा को स्कूल से अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। इसके लिए छात्रा की लिखित माफी स्कूल तक भिजवाई जाएगी। -राजेश पांडेय एसएसपी
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मुकदमे में मात्र 250 रुपये जुर्माने की सजा
कानून के जानकार बताते हैं कि छात्रा नाबालिग है, जो तहरीर शिक्षिका के पिता द्वारा दी गई है उसमें आईटी एक्ट में मुकदमा बनता है। इस मुकदमे में नाबालिग को तीन साल से अधिक की सजा का प्रावधान नहीं है। थाने से जमानत दी जा सकती है। ऐसे में अधिकतम 250 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। इसलिए इस प्रकरण में छात्रा को सामाजिक तौर पर या स्कूल में दंडित कराया जाना ही उचित माना जा रहा है।
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