न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
पिछले कुछ दिनों से बूंदा बांदी और बारिश के चलते बने उमस भरे माहौल में संक्रामक रोगों का वार शुरू हो गया है। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में इनसे पीड़ित मरीजों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। डॉक्टरों ने इसके लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है।
मलखान सिंह जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. यशपाल रावल कहते हैं कि संक्रामक रोगों के फैलने का सबसे अनुकूल मौसम बारिश का है। इस समय हर तरफ उमस होती है। इसलिए रोगाणु, विषाणु खूब पनपते हैं।
व्यक्ति की शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कुछ कम हो जाती है, लेकिन अगर सावधानी बरतें तो काफी हद तक इनसे बच सकते हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 1600 से 1800 मरीज प्रतिदिन आते हैं। इस समय करीब 40 फीसदी से अधिक मरीज संक्रामक रोगों के शिकार आ रहे हैं।
क्या है संक्रामक रोग
संक्रामक रोग, रोग जो किसी न किसी रोगजनित कारको रोगाणुओं जैसे प्रोटोज़ोआ, कवक, जीवाणु, वाइरस इत्यादि के कारण होते हैं। संक्रामक रोगों में एक शरीर से अन्य शरीर में फैलने की क्षमता होती है। मलेरिया, टायफायड, चेचक, इन्फ्लुएन्जा आदि संक्रामक रोग हैं।
डॉ. यशपाल रावल संक्रामक रोगों से बचने के लिए सलाह देते हैं
- पोषण पर जोर दें, पानी खूब साफ पानी पिएं कुछ संक्रामक रोग जैसे दस्त, पेचिश, हैजा, मियादी बुखार, पीलिया तथा पोलियो अशुद्ध पानी से भी होता है
- सेब, अनार, संतरा, पपीता, केला आदि ताजे फल खाने चाहिए। गाजर, मटर, लोबिया, मूंग की दाल, गोश्त (मीट, चिकन सूप तथा मछली) भी खानी चाहिए। इससे जिंक आयरन, आयोडीन, सीलिनियम प्रोटीन इत्यादि मिलेंगे और प्रतिरक्षण क्षमता बढ़ेगी।
- दूध पीने से कैल्शियम और विटामिन डी की पूर्ति होती है। रात को सोते समय न पिएं क्योंकि मुंह में उपस्थित रोगाणु रात में पनपते हैं और पायरिया रोग पैदा कर सकते हैं। दूध पीने के बाद ठीक से कुल्ला कर लें।
- शहद और नींबू का रस मिलाकर पीजिए। ताजगी आयेगी और बलगम भी साफ होगा।
- मुलेठी चूसिए, यह शरीर में इन्टरफेरोन की मात्र बढ़ाती है जो विषाणु (वायरस) से लड़ने के लिए उपयुक्त होता है।
- मुनक्का चीकू, जंगल जलेबी खाएं, पीलिया से बचें।
- समय पर भोजन कीजिए। पाचन शक्ति ठीक काम करेगी, स्वास्थ्य ठीक रहेगा और रोगाणु के हमले से बचे रहेंगे।
- भोजन से पहले हाथ धोएं, नियमित बाल कटवाएं, शेविंग कराएं,
- रोजाना ठंडे पानी से स्नान करें, इससे रक्त की श्वेत कोशिकाएं भी अधिक बनती हैं। जो संक्रामक रोगों से हमारी रक्षा करती हैं।
- हल्की कसरत नियमित करें। रक्षात्मक शक्ति बढ़ेगी।
मक्खियों को कीटनाशक पदार्थ छिड़क कर मार दें, भोजन को ढक कर रखें, साल में एक बार घर की चूने से पुताई करायें। कुछ रोगाणु दीवारों पर या कोनों में अपना अड्डा बना लेते हैं। भीड़ भाड़ से दूर रहें। इसमें सावधानी ही बचाव है
- डॉ. यशपाल रावल, वरिष्ठ परामर्शदाता, जिला अस्पताल