29 कुपोषित बच्चों के दिल में छेद है। यह बात राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के जेएन मेडिकल कॉलेज में संचालित डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआईसी) की जांच में सामने आई है। इनमें 19 बच्चे अलीगढ़, हाथरस के 4, एटा के 2, सम्भल के 2, आगरा का 1 और मथुरा का भी 1 बच्चा शामिल है। कुपोषितों पर अमर उजाला की पड़ताल के बाद बच्चों के इलाज पर महकमा हरकत में आया है और बीमारियों को चिह्नित करने के बाद अब तक तीन बच्चों की हार्ट सर्जरी भी कर दी गई है। इन सभी पंजीकृत बच्चों का उपचार नि:शुल्क हो रहा है।
कुपोषित बच्चों पर अमर उजाला की पड़ताल लगातार जारी है। इन बच्चों को 2 वर्ष के अंदर उपचार मिल जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। लिहाजा, कुपोषण से ग्रस्त ज्यादातर बच्चों को गंभीर बीमारियों ने जकड़ लिया है। या फिर बीमारियों से ही बच्चे कुपोषित हो गए हैं। इन परिवारों की माली हालत भी ठीक नहीं बची है। ऐसे बच्चों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से ही आस है। हालांकि हर बच्चे की जांच और सही जगह रेफर करने को टीम लगाई गई हैं। परंतु टीम की रफ्तार बेहद सुस्त है। ज्यादातर पीड़ित जानकारी के अभाव में दर-दर की ठोकर खा रहे हैं या सिंहपुर की डॉली की तरह बिना उपचार के मरने को मजबूर हैं। जबकि ऐसे बच्चों को डीईआईसी तक लाना पहुंचाना टीम की जिम्मेदारी है।
डीईआईसी जब अमर उजाला की पड़ताल के दायरे में आया तो पता लगा कि यहां अब तक कुल 795 बच्चे पंजीकृत हुए हैं। जिनमे 437 बच्चे अलीगढ़ के हैं। इनमें 243 बच्चे आरबीएसके टीम द्वारा भेजे गए हैं। शेष मेडिकल कालेज की ओपीडी या वार्ड से यहां तक पहुंचे हैं। डीईआईसी की जांच में पंजीकृत बच्चों में से कुल 29 बच्चों के दिल मे छेद मिले हैं। असद की हार्ट सर्जरी 1 फरवरी, एटा की मोनिका पुत्री सतीश चंद की 31 जनवरी और मथुरा के राज पुत्र भगवान को 23 जनवरी में ऑपरेट कर दिया गया है।
इनके दिलों में है सुराग
अलीगढ़ में 19: निम्रा खान (15 दिन) पुत्री असलम खान, भावना (2 वर्ष) पुत्री उपेंद्र, जयंत (2 वर्ष) पुत्र धीरज कुमार, वंश (2 वर्ष) धीरज कुमार, मधु (12 वर्ष) पुत्री लालसिंह, कुसुम (12 वर्ष) पुत्री शीशपाल, पल्लवी (5 वर्ष) पुत्री पप्पू, अदीबा (डेढ़ वर्ष) पुत्री मोहसिन, असद (4 वर्ष) पुत्र शाहबुद्दीन, आरिफ (4 वर्ष) पुत्र कमरुद्दीन, फरदीन (16 वर्ष) पुत्र साजिद, शाहजेब (2 वर्ष) पुत्र अली इमरोज, तनु (7 वर्ष) पुत्री भीकंबर, आशु (डेढ़ वर्ष) पुत्र पपेंद्र चौहान, चांद रानी (13 वर्ष) पुत्री इलियास, वैशाली (4 वर्ष) पुत्री आशुतोष, अली हसन (5 माह) पुत्र उमर हुसैन, रवि (18 वर्ष) पुत्र शोधन सिंह और खुशबू (12 वर्ष) श्रीभाग।
चंडौस के नगला जैद के धीरज कुमार के दोनों 2 वर्षीय जुड़वा बेटे जयंत और वंश के दिलों में छेद है। इसके अतिरिक्त इनमें 74 फीसदी बच्चे देहात क्षेत्र के हैं और 63 फीसदी बेटियां हैं। इनमें टीम द्वारा चंडौस से 3, टप्पल से 1 और हरदुआगंज से 1 बच्चा डीईआईसी भेजा गया है।
हाथरस से 4: हर्ष 3 वर्ष पुत्र वीरेंद्र कुमार, कैफ 11 वर्ष पुत्र साजिद, शालू 14 वर्ष पुत्री राजकुमार और गुंजन 5 माह प्रमोद।
आगरा: नसीम 5 वर्ष पुत्र पप्पू। एटा: सुमैया 7 माह पुत्री मोहम्मद मोहसिन, मोनिका 5 वर्ष पुत्री सतीश। मथुरा: राज 5 वर्ष पुत्र भगवानदास। संभल: बंटी 12 वर्ष पुत्र दौलत, शिवानी 4 वर्ष पुत्री शिवानी।
ऐसे कराएं पंजीकरण
यदि आप ग्रामीण क्षेत्र के हैं तो आंगनबाड़ी या सीएचसी जाकर आरबीएसके टीम से स्क्रीनिंग कराएं। शहरी नागरिक मेडिकल की ओपीडी में बच्चे को दिखाएं, जरूरत होने पर आपको वहीं से डीईआईसी रेफर कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त यदि जिला अस्पताल से डीईआईसी रेफर किया जाता है तो भी पंजीकरण हो जाएगा। यहां पंजीकरण के बाद आपके बच्चे को नि:शुल्क उपचार मिलने लगेगा।
यह है डीईआईसी
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर हर जिले में है, लेकिन अपने जिले का सेंटर सूबे में एकमात्र एक्सीलेंस एक्सपर्ट है। अलीगढ़ सहित मथुरा, बुलंदशहर, कासगंज, एटा, संभल, आगरा, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, दादरी व झांसी तक के क्रिटिकल बच्चे यहीं भेजे जाते हैं। सेंटर की नोडल अफसर डॉ. उज्मा फिरदौस कहती हैं कि जेएन मेडिकल कॉलेज परिसर में होने के कारण सेंटर को बहुत मदद मिलती है। उन्होंने बताया कि जन्मजात दोष, कमी, बीमारी और विकासात्मक विलंब संबंधी 38 बीमारियों का यहां पूरी तरह नि:शुल्क उपचार है।
ये हैं टीम में
नोडल अफसर डॉ. उज्मा फिरदौस, मेडिकल अफसर डॉ. इश्तियाक, डॉ. शहजाद, डॉ. असद अब्बास, डॉ. शाद आबकारी, डॉ. नवेदुर्रह्मान और मैनेजर अनवर सिद्दीकी और उनकी टीम में फिजियोथेरेपिस्ट, चाइल्ड साइक्लोजिस्ट, स्पेशल एजुकेटर, ऑप्टोमेट्रिस्ट, लैब टेक्नीशियन, स्टाफ नर्स सहित करीब डेढ़ दर्जन से अधिक स्टाफ है।