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शिकंजा कसा: अलीगढ़ शराब कांड की मजिस्ट्रेटी जांच में दोषी मिले 26 अधिकारी, शासन को भेजी गई रिपोर्ट

Sun, 03 Apr 2022 09:54 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

जांच में साफ हुआ कि जिले की कुछ शराब की दुकानें ऐसे लोगों के हाथों में थी, जिनके द्वारा डिस्टेलरी से गुड इवनिंग ब्रांड की देसी शराब के साथ-साथ नकली रैपर, बोतल, बार कोड का उपयोग कर नकली शराब तैयार कराई जा रही थी।
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Amar Ujala Admin in Laravel 5 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिले में पिछले साल जहरीली शराब के सेवन से हुई 106 लोगों की मौत के मामले में मजिस्ट्रेटी जांच पूरी कर ली गई है। इस घटना ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया था। प्रकरण में एडीएम प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट डीएम के माध्यम से शासन को भेज दी है। जांच में पुलिस व आबकारी विभाग से जुड़े 26 अधिकारी- कर्मचारियों को दोषी माना गया है। इन सभी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है। अब इन सभी पर शासन स्तर से करवाई का निर्णय लिया जाएगा।  

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जिले में 28 मई 2021 को सुबह लोधा के गांव करसुआ से शराब पीने से पांच लोगों की मौत हो गई। पता चला कि गांव के ठेके से लोगों ने शराब खरीदी और सेवन करने के बाद हालत बिगड़ गई। इसके बाद खैर के गांव रायट, अंडला, जवां, हैबतपुर, फतेह नगरिया, नंदपुर पला, पचपेड़ा, सांगोर आदि गांव में शराब सेवन से लोगों की मौत होने का सिलसिला शुरू हो गया। पहले ही दिन 22 से अधिक लोगों की मौत हो गई।

इसके बाद भी लगातार 10 दिनों तक मौतों का सिलसिला नहीं थमा। थाना खैर, गभाना, जवां के बाद शहर के क्वार्सी, गांधीपार्क क्षेत्र समेत पूरे जिले में शराब सेवन से 106 लोगों की मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने खैर, लोधा, पिसावा, गभाना, जवां, महुआखेड़ा, क्वार्सी आदि थानों में 33 मुकदमे दर्ज किए गए। शराब कांड में मुख्य आरोपी ऋषि शर्मा और मुनीश शर्मा समेत करीब 85 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा है। कोर्ट में यह मामला ट्रायल पर चल रहा है। पुलिस प्रशासन स्तर से आरोपियों से करोड़ों की संपत्ति भी जब्त की गई है। 

मजिस्ट्रेटी जांच में ये तथ्य आए सामने

जहरीली शराब प्रकरण में डीएम सेल्वा कुमारी जे. और एडीएम प्रशासन डीपी पाल ने जांच करते हुए पीड़ित परिजनों, ग्रामीणों, पुलिस, राजस्व, आबकारी विभाग, पोस्टमार्टम में करने वाले डॉक्टरों के भी बयान दर्ज किए। डाक्टरों के भी बयान लिए गए। जांच में साफ हुआ कि जिले की कुछ शराब की दुकानें ऐसे लोगों के हाथों में थी, जिनके द्वारा डिस्टेलरी से गुड इवनिंग ब्रांड की देसी शराब के साथ-साथ नकली रैपर, बोतल, बार कोड का उपयोग कर नकली शराब तैयार कराई जा रही थी।

जांच में पता चला कि एक संगठित गिरोह पिछले काफी समय से इस गोरखधंधे को संचालित कर रहा था। जांच अधिकारी एडीएम प्रशासन के अनुसार यह मामला पुलिस व आबकारी विभाग के संज्ञान में था और प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष सहयोग से ही अवैध शराब के निर्माण व बिक्री की व्यवस्था संचालित की जा रही थी। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि आबकारी व पुलिस विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों ने शासकीय दायित्वों का पालन न करते हुए घोर लापरवाही बरती है। इसके लिए संबंधित विभागीय अधिकारी और कर्मचारी  प्रथम दृष्टया दोषी हैं।

सजग होते अधिकारी तो नहीं होती मौत 

एडीएम प्रशासन ने जांच में स्पष्ट किया है कि जहरीली शराब से हुई मौत के मामले में आबकारी अधिकारी और पुलिस विभाग से जुड़े अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई। यदि वे समय रहते इस प्रकरण में गंभीरता दिखाते तो जिले में शराब के सेवन से 100 से अधिक लोगों की मौत नहीं होती।
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इन पर हुई कार्रवाई की संस्तुति

तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी धीरज शर्मा, आबकारी निरीक्षक क्षेत्र अतरौली अवनीश कुमार पांडेय, आबकारी निरीक्षक गभाना चंद्र प्रकाश यादव, आबकारी निरीक्षक लोधा, खैर व टप्पल राजेश कुमार यादव, आबकारी सिपाही रामराज राना, अशोक कुमार,नितेंद्र सिंह, प्रमोद कुमार शर्मा, योगेंद्र सिंह, तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक अकराबाद रजत कुमार शर्मा, प्रभारी निरीक्षक खैर प्रवेश कुमार, प्रभारी निरीक्षक गभाना सुबोध कुमार, प्रभारी निरीक्षक टप्पल प्रवीन कुमार मान, थानाध्यक्ष जवां चंचल सिरोही, थानाध्यक्ष लोधा अभय कुमार शर्मा, चौकी प्रभारी जट्टारी शक्ति राठी, चौकी प्रभारी जवां अरविंद कुमार, चौकी प्रभारी पनैठी सिद्धार्थ कुमार, हैड मुंशी लोधा उम्मेद सिंह, आरक्षी श्रवण कुमार, आलोक कुमार, घनेंद्र, एहतेशाम खां, अमित कुमार, रोहित कुमार व विक्की शर्मा शामिल हैं। इनमें से कई अधिकारी और कर्मचारियों का गैर जनपदों में स्थानांतरण हो चुका है। कई अधिकारी अभी भी निलंबित चल रहे हैं।
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