न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
मेडिकल रोड स्थित जामिया उर्दू संस्था में अवैध निर्माण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले में हुई शिकायत की जांच में जांच अधिकारी एवं एसीएम द्वितीय ने शिकायत सही पाई है।
उन्होंने अपनी रिपोर्ट में संस्था के सचिव एवं रजिस्ट्रार द्वारा अवैध निर्माण की बात मानने तथा स्वयं ध्वस्तीकरण कराए जाने के शपथपत्र का अनुपालन न किये जाने की बात कही है। साथ ही इस अवैध निर्माण को विकास प्राधिकरण के माध्यम से ध्वस्त किए जाने की संस्तुति डीएम से की है।
अनोना हाउस सिविल लाइन निवासी जामिया उर्दू संस्था के सदस्य डॉ. मुहम्मद उस्मान खां ने डीएम को प्रेषित शिकायती पत्र में आरोप लगाया था कि संस्था परिसर में कार्यालय उप निबंधक फर्म्स सोसाइटीज एवं चिट्स आगरा की मिलीभगत से अवैध रूप से निर्माण कार्य कराया गया। डीएम ने इसकी जांच एसीएम द्वितीय एके त्रिपाठी को सौंपी।
अपनी जांच रिपोर्ट में एसीएम ने बताया कि अभिलेखों के परीक्षण से पता चला है कि संस्था के सचिव एवं रजिस्ट्रार सिविल लाइन निवासी शमून रजा पुत्र महफूजउर्रहमान ने अपने शपथ पत्र में कहा था कि संस्था के नक्शे में पीले रंग से दिखाए भाग को ध्वस्त दर्शाया गया है। एडीए के 13 जून 2014 के पत्र में संस्था सचिव एवं रजिस्ट्रार को निर्देश दिए गए थे कि आप दस दिन में अवैध रूप से बने भाग को ध्वस्त कर लिखित रूप से सूचित करें।
अन्यथा की स्थिति में उक्त हिस्से को सील कर ध्वस्त करा दिया जाएगा। एडीए ने चार जुलाई 2014 को अनु सचिव आवास एवं शहरी नियोजन को भी जानकारी दी थी कि संस्था की सात मंजिला बिल्डिंग में अनधिकृत निर्माण के संबंध में कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
यदि निर्माणकर्ता दस दिन में अवैध रूप से बने भाग को स्वत: ध्वस्त नहीं कराता है तो नियमानुसार विभाग ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा। एसीएम अनिल कुमार त्रिपाठी ने बताया कि संस्था के सचिव ने शपथपत्र में अवैध निर्माण को स्वयं ध्वस्त कराने की बात तो कही, लेकिन उस पर अमल नहीं किया।