खेतों में ही सड़ गया किसानों का कुंतलों बाजरा
ब्यूरो, अमर उजाला अतरौली (अलीगढ़)।
कुदरत भी कई साल से अन्नदाता का साथ नहीं दे रही। कभी ओला तो कभी सूखा और कभी बेमौसम बारिश किसान को आर्थिक रूप से तोड़ देती है। सरकारों से मुआवजे का ऐलान तो होता हैं, पर समय से मदद की रकम भी किसानों के खाते में नहीं पहुंचती। इस बार बारिश से सैकड़ों किसानों का कुंतलों बाजरा खेतों में ही सड़ गया।
हालांकि बाजरा पैदा करने वालों के लिए यह बारिश मुसीबत बनी है वहीं धान पैदा करने वाले किसानों के लिए बारिश किसी अमृत से कम नहीं है। धान पैदावार करने वाले किसान बारिश से बेहद खुश हैं।
क्षेत्र में बाजरा का रकवा अच्छा खासा है। आलू पैदा करने वाले ज्यादातर किसानों ने आलू उठने के बाद जैसे ही खेत खाली हुए उसमें बाजरा की फसल बो दी। बाजरा अब पक कर तैयार है और खेतों में कटा पड़ा है। कई दिनों से हो रही बारिश के कारण बाजरा की बाली भीग गई इससे थ्रेसर भी नहीं चल सके। अब वहीं बाजरा खेतों में ही सड़ने लगा है। दाना काला पड़ चुका है। किसानों का मानना है कि अब इस बाजरा के मंडी में जो रेट चल रहा है वह दाम भी नहीं मिलेंगे। आलू किसान पहले ही आलू का रेट डाउन होने से परेशान हैं वहीं अब बाजरा से कुछ उम्मीद लगाए बैठे थे। लेकिन कुदरत ने उनकी आस तोड़ दी।
- किसान पर कुदरत का कहर कई सालों से बरप रहा है। पूर्व में ओला वृष्टि व सूखा के मुआवजे की राशि तमाम किसानों को आज तक नहीं मिली।- राजवीर कांजियर, जगतपुर
- बारिश से बाजरा खेतों में ही सड़ने लगा है। दाना काला पड़ने से मंडियों में भी इसका रेट सही नहीं मिल पाएगा। धान वाले किसान बारिश से खुश हैं।- पुष्पेंद्र लोधी, खैराबाद
- किसान बेहद परेशान हैं। बारिश ने बाजरा की फसल को बेकार कर दिया है। सैकड़ों किसानों का हजारों कुंटल बाजरा सड़ गया।- राजू लोधी, शेखूपुर
किसान पर स्टॉक खत्म तो टमाटर के भाव बढ़े
अतरौली। कुछ दिन पहले आलम यह था कि टमाटर को कोई लेने वाला नहीं था। किसान पांच रुपये किलो तक में टमाटर बेच चुके हैं। अब किसानों के पास टमाटर नहीं है। मार्केट में अब टमाटर का रेट उछाल मारकर 40-50 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।