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हिंदू मुस्लिम एकता के लिए गांधी ने किया था काफी जद्दोजहद

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डेस्क न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
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अलीगढ़। प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने कहा कि महात्मा गांधी ने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए काफी जद्दोजहद की थी। राष्ट्र के निर्माण में उनकी भूमिका बहुत श्रेष्ठ एवं प्रासंगिक है।
प्रो. इरफान हबीब एएमयू के इतिहास विभाग के सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज में गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने सांप्रदायिक दंगों के दौरान दूरियों को कम करने तथा धार्मिक सद्भावना को विकसित करने के भरपूर प्रयास किए।
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उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के सामने एक ओर भारतीय समाज तथा दूसरी ओर ब्रितानी सरकार थी, जिसके अपने हित थे। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने विभिन्न स्थानों पर अपने प्रयासों से दंगों को काबू में किया। वह छुआछूत की समाप्ति तथा स्वदेशी आंदोलन को भारतीय समाज के विकास के लिए अति आवश्यक मानते थे। इसके साथ ही हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक सौहार्द तथा अच्छे रिश्तों को देश में शांति एवं खुशहाली के लिए आवश्यक समझते थे।

इतिहासकार प्रो. शीरीं मूसवी ने कहा कि महात्मा गांधी का चिंतन वर्तमान समय की आवश्यकता है। इससे पूर्व इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. एसए नदीम रेजावी ने कार्यक्रम के विषय का परिचय कराया। इतिहास विभाग की शोधार्थी लुबना इरफान ने ‘महात्मा गांधी तथा छात्रों के लिए उनका संदेश’ विषय पर भाषण प्रस्तुत किया। जबकि एमए की छात्रा जैनब नकवी ने ‘स्वतंत्रता संग्राम तथा देश के निर्माण में महात्मा गांधी ने किस प्रकार महिलाओं को जोड़ा’ विषय पर प्रकाश डाला।
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सफाई कर्मचारी से प्रदर्शनी का उद्घाटन
इतिहास विभाग में गांधी जयंती पर प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। मुख्य आकर्षक यह रहा कि इसका उद्घाटन विभाग के सफाई कर्मचारी नरेश कुमार ने किया।
प्रदर्शनी में गांधी जी द्वारा प्रयोग किये जाने वाले चरखे को भी रखा गया। इसके साथ ही महात्मा गांधी द्वारा लिखित पुस्तकों तथा उनके जीवन, सेवाओं एवं स्वतंत्रता आंदोलन पर लिखित मुख्य पुस्तकों को शामिल किया गया। इस अवसर पर गायक कलाकार स्वर्गीय मोहम्मद रफी का प्रसिद्ध गीत ‘सुनो सुनो ऐ दुनिया वालो, बापू की यह अमर कहानी’ उपस्थित जनों को सुनाया गया। उल्लेखनीय है कि यह गीत महात्मा गांधी के निधन के बाद शोक में पंडित जवाहर लाल नेहरू के आह्वान पर तैयार किया गया था।
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