न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
ई फार्मेसी, ऑनलाइन दवा बिक्री और अन्य प्रावधानों के विरोध में दवा विक्रेताओं से दुकान बंदी का आह्वान किया गया था। जिसके चलते शुक्रवार को दवा की दुकानें बंद रहीं। हालांकि शहर में कुछ इलाकों में और ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश इलाकों में दवा की दुकानें खुली रहीं।
इस बंदी के लिए दवा विक्रेताओं के दो अलग-अलग संगठन एक दूसरे के परस्पर विरोध में थे। जिला अलीगढ़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने जहां बंदी का समर्थन करते हुए ज्ञापन दिया। वहीं रिटेलर्स केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री उमेश श्रीवास्तव ने कहा है कि हम न तो बंदी के समर्थन में हैं न विरोध में हैं। ई फार्मेसी से रिटेलर का कोई नुकसान नहीं है।
जिला अलीगढ़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह टिल्लू ने बताया कि शुक्रवार को जिला अलीगढ़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर दवाओं की दुकानें बंद रहीं। दवा विक्रेताओं के साथ एक बैठक कर उन्हें नई फार्मेसी और नई व्यवस्था से होने वाले नुकसानों के विषय में बताया गया।
एसोसिएशन ने ई फार्मेसी, ऑनलाइन दवा बिक्री, रिन्यूवल में आ रही समस्याओं और फार्मेसिस्ट को लेकर आ रही समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंच कर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन भी जिलाधिकारी को दिया। दूसरी ओर रिटेलर्स केमिस्ट एंड ड्रगस्टि एसोसिएशन के महामंत्री उमेश श्रीवास्तव ने कहा कि दवा दुकानों की बंदी का फरमान सिर्फ और सिर्फ होल सेलरों को होने वाले नुुकसान को ध्यान में रखकर दिया है।
रिटेलरों की फार्मेसिस्ट समस्या से कोई लेना देना नहीं है। इस संबंध में उन्होंने आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन मिनस्ती एस के पत्र का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया है कि दवाओं को आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अंतर्गत आवश्यक वस्तु माना गया है।