22 वर्षों से मेयर पद पर भाजपा का कब्जा
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
महानगर बनने के बाद यानी पिछले 22 साल से मेयर पद पर भाजपा का कब्जा है। खास बात यह भी है कि चार बार हुए चुनाव में तीन बार भाजपा एवं बसपा के बीच मुख्य मुकाबला हुआ है। 2006 से बिना सिंबल के चुनाव लड़ रहे बसपा प्रत्याशियों को इस बार ‘हाथी’ चिन्ह मिलने से मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है।
नगर निगम बनने के बाद मेयर पद का पहला चुनाव 1995 में हुआ। इसमें भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय ने बसपा के अब्दुल खालिक को 7 हजार से अधिक मतों से पराजित कर मेयर पद पर कब्जा किया।
2000 में मेयर पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित था। इसमें भाजपा की सावित्री वार्ष्णेय ने बसपा की रजिया खान को पांच हजार से अधिक मतों से पराजित किया। 2006 में आशुतोष वार्ष्णेय ने सपा के जमीरउल्लाह खान को 20 हजार से अधिक मतों से पराजित कर दूसरी बार मेयर पद कब्जाया। मेयर पद पर पहली बार भाजपा एवं सपा के बीच 2006 में ही मुख्य मुकाबला हुआ था।
फिर 2012 में भाजपा की शकुंतला भारती ने बसपा प्रत्याशी रजिया खान को पराजित किया। 2006 एवं 2012 में बसपा प्रत्याशी को चुनाव चिन्ह नहीं मिला था। लेकिन इस बार बसपा ने नगर निगम, नगर पालिका एवं नगर परिषद चुनाव के प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह पर लड़ाने का फैसला किया है।
इससे निकट भविष्य में होने वाले चुनाव दिलचस्प होंगे। मेयर पद भाजपा के लिए जहां प्रतिष्ठा का प्रश्न है। वहीं बसपा एवं सपा सहित दूसरे विरोधी दलों के लिए जिले एवं महानगर की राजनीति में अपनी वजूद बचाए रखना चुनौती है। बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष गजराज सिंह विमल कहते हैं कि सिंबल पर प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने से काफी फायदा होगा।
भाजपा अध्यक्ष के पास दावेदारों की भीड़
मेयर का पद अनारक्षित है। यह घोषणा होने के बाद भाजपा महानगर अध्यक्ष विवेक सारस्वत के पास मेयर एवं पार्षद पद के लिए दावेदारी करने वाले नेताओं की भीड़ लग गई है।
मेयर पद के लिए अभी तक जिन लोगों का बायोडाटा पहुंचा है, उनमें प्रशांत सिंघल, प्रवीण अग्रवाल, डॉ. जयंत शर्मा, सुशील मित्तल, मुकेश उपाध्याय मांची, दीपक मित्तल, कुलदीप पांडेय, डॉ. मधु आंधीवाल, संगीता वार्ष्णेय, कृष्णा गुप्ता, डॉ. डीडी गुप्ता आदि के नाम शामिल हैं।
कई भाजपा नेता शुक्रवार को लखनऊ में आला नेताओं से मिलने पहुंच गए। महानगर अध्यक्ष विवेक सारस्वत के अतिरिक्त ब्रज क्षेत्र के संगठन मंत्री भवानी सिंह, प्रभारी मंत्री सुरेश राणा तक पहुंच चुके हैं।
प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल के अतिरिक्त आरएसएस, विद्यार्थी परिषद एवं आरएसएस की संस्थाओं से जुड़े बड़े नेताओं के पास भी टिकट के लिए नेता परिक्रमा कर रहे हैं। विवेक सारस्वत ने बताया कि अब तक करीब डेढ़ दर्जन बायोडाटा उनके पास पहुंच चुके हैं।