इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़।
जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी द्वारा एआईएमएएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की खिलाफत में उतर आने पर एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष शहजाद आलम बरनी ने मौलाना मदनी को आड़े हाथों लिया है।
अपने छात्र संघ अध्यक्ष के कार्यकाल में ओवैसी को एएमयू में आमंत्रित कर चुके शहजाद ने कहा कि देश में 5-6 मौलानाओं के परिवार 70 साल से कांग्रेस की दलाली कर मुसलमानों को सुरक्षा का डर दिखा रहे हैं।
ओवैसी को लेकर दिए गए मौलाना महमूद के बयान की आग की तपिश अलीगढ़ में भी पहुंच गई है। मौलाना के बयान को लेकर पूर्व अध्यक्ष शहजाद आलम ने खास बातचीत में कहा कि महमूद मदनी को राजनीति में नहीं पड़ना चाहिए, बल्कि उलेमा को उलेमा की तरह रहना चाहिए।
कहा, असदुद्दीन ओवैसी की मुखालफत करना किसी भी तरह से इस्लाम का हिस्सा नहीं है। एक तरफ मुसलमानों की तरक्की की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ एक मुसलमान को कामयाब नहीं होने देंगे, तो फिर यह कौन सा इस्लाम है। उन्होंने कहा कि मौलाना को अपनी राजनीतिक दुकान बंद होते दिखाई दे रही है, इसलिए घबरा रहे हैं। इन मौलानाओं ने पिछले 70 साल से मुसलमानों को इस पर डराया कि अगर महफूज रहना है, तो कांग्रेस के साथ रहिए।
महाशिवरात्रि का था मौका, प्रशासन से नहीं मिली थी अनुमति
वर्ष 2012-2013 में छात्रसंघ अध्यक्ष शहजाद आलम बरनी ने मार्च-13 में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तिहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी को यूनिवर्सिटी में आने की दावत दी थी।
बरनी से पहले और न बाद में ओवैसी को किसी ने भी यहां नहीं बुलाया है। यह बात अलग है कि महाशिवरात्रि पर्व के चलते ओवैसी को बुलाने की प्रशासन से अनुमति नहीं मिली थी।