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क्यों नहीं इमरान खान के पास भेजवा देते जिन्ना की तस्वीर

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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एएमयू छात्र संघ चुनाव में पाकिस्तान के जनक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर मुद्दा बनेगी। इस बात की चर्चा कैंपस में शुरू हो गई है। मानव संसाधन विकास मंत्री सत्यपाल सिंह ने लोकसभा में बताया है कि एएमयू में अभी छात्र संघ भंग है। अगली यूनियन इस संबंध में कोई निर्णय लेगी। इस बयान के बाद चर्चा शुरू हो गई है कि क्या एएमयू छात्र संघ चुनाव में जिन्ना को मुद्दा बनाया जाएगा।

हालांकि इस संबंध में छात्र नेताओं की राय अलग-अलग है। कुछ का कहना है कि एएमयू छात्र संघ नहीं, बल्कि लोकसभा चुनाव में भाजपा जिन्ना को चुनावी मुद्दा बनाना चाहती है। सचमुच में मानव संसाधन विकास मंत्रालय या केंद्र सरकार चाहती है कि यूनियन हॉल से जिन्ना की तस्वीर हटाई जाए तो एक-दो लाइन का निर्देश एएमयू वीसी के पास भेज दें। एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन कहते है कि पाकिस्तान में 11 अगस्त को इमरान खान प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। अपने देश से कई लोग अतिथि के रूप में शामिल होने वाले हैं। सरकार चाहे तो जिन्ना की तस्वीर को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को गिफ्ट के रूप में भेजवा दे।
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जिन्ना कोई मुद्दा नहीं है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय दो लाइन में लिखकर वीसी को दे दें कि तस्वीर हटा दें। दरअसल, भाजपा जिन्ना के मुद्दे को उठाना चाहती है, तस्वीर को हटाना नहीं चाहती। नई यूनियन क्यों चाहेगी कि जिन्ना की तस्वीर हटाए। यह उसके इतिहास का हिस्सा है। सरकार स्वयं जिन्ना की तस्वीर पाकिस्तान को गिफ्ट कर दे और कहे कि हिंदुस्तान को जिन्ना की जरूरत नहीं है।
- फैजुल हसन, पूर्व अध्यक्ष, एएमयू छात्र संघ

भाजपा अपनी सरकार और अलीगढ़ के सांसद सतीश गौतम अपनी टिकट बचाने के लिए जिन्ना का मुद्दा उठा रहे हैं। एएमयू छात्र संघ चुनाव पढ़े-लिखे लोगों का है। इसमें जिन्ना की तस्वीर नहीं, बल्कि छात्र हित के मुद्दे उठाएंगे। जिन्ना की तस्वीर से सरकार को कोई दिक्कत है तो सर्कुलर जारी कर उसे हटाने का निर्देश दे। एएमयू के यूनियन हॉल से ही क्यों मुंबई से जिन्ना हाउस, मुंबई हाईकोर्ट एवं नेहरू म्यूजियम से जिन्ना की तस्वीर भी हटाई जाए। एएमयू के लिए जिन्ना इतिहास की तारीख है, आस्था नहीं।
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-मशकूर अहमद उस्मानी, निवर्तमान अध्यक्ष, एएमयू छात्र संघ

जिन्ना प्रकरण में एएमयू छात्रसंघ ने आधारहीन और विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल करने वाला तस्वीर नहीं हटाने का ड्रामा रचा था, जिसके पीछे छात्रसंघ के पास कोई तर्क भी नहीं था। यह निर्णय मात्र विपक्षी राजनीतिक दलों के इशारे पर लिया गया था। यह ज्ञात है कि अब छात्रसंघ का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और राष्ट्रहित एवं सामाजिक हित में यही ठीक होगा कि अब एएमयू प्रशासन इस प्रकरण में आगे आकर तस्वीर को हटवाए और इस विषय को समाप्त करें।
- डॉ. निशित शर्मा, इंटर्न एएमयू एवं भाजयुमो नेता
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