फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलीगढ़... हरियाणा के किसानों ने लेखपाल, कानूनगो को बनाया बंधक

विज्ञापन
विज्ञापन
हरियाणा के किसानों ने लेखपाल, कानूनगो को बंधक बनाया
विज्ञापन



ब्यूरो, अमर उजाला, खैर / टप्पल (अलीगढ़)।

यूपी-हरियाणा सीमा विवाद गुरुवार को गहरा गया। हरियाणा के पलवल जिले के काशीपुर गांव के दबंग किसानों ने अलीगढ़ जनपद के कुछ किसानों समेत लेखपाल और कानूनगो को बंधक बना लिया। अलीगढ़ के किसानों के साथ मारपीट भी की। इस खबर से प्रशासनिक अमले में हलचल मच गई। अलीगढ़ से टप्पल एसओ फोर्स के साथ पहुंचे तो दूसरी ओर से हरियाणा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए।

बताते हैं कि काफी देर तक हरियाणा के किसान नहीं मानें। बाद में खैर के एसडीएम जोगिंद्र सिंह ने हरियाणा के अधिकारियों समेत काशीपुर के किसानों से वार्ता की, तब बंधक बने सरकारी कर्मी और ग्रामीण छूट सके। उधर देर शाम गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए टप्पल थाने में प्रदर्शन किया। उन्होंने काशीपुर के 19 किसानों के खिलाफ तहरीर दी गई है।
विज्ञापन


पिछले दिनों अलीगढ़ के लालपुर, किशनपुर के किसानों ने हरियाणा के किसानों पर फसलें काटकर ले जाने का आरोप लगाया था। इस पर एसडीएम ने हरियाणा के अधिकारियों से वार्ता शुरू की थी। मामला हल होने तक खेत में बुआई, कटाई न हो इसके लिए पीएसी की तैनाती की गई। राजस्व टीम को निरंतर पेट्रोलिंग करने के निर्देश दिए गए।

बुधवार को पीएसी के साथ लेखपाल धर्मवीर, कानूनगो अहमद अली पेट्रोलिंग करते हुए काशीपुर पहुंच गए। लालपुर के कुछ किसान भी उनके साथ थे। बताते हैं कि लालपुर के किसानों ने आक्रोश में काशीपुर के खेतों में लगे इंजन आदि तोड़ दिए। यह खबर फैलते ही काशीपुर के किसानों ने लेखपाल, कानूनगो एवं लालपुर के ग्रामीणों को बंधक बना लिया। पीएसी मूकदर्शक बनी रही। सूचना पर टप्पल इंस्पेक्टर सुनील कुमार फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। उधर हरियाणा के पलवल जिले के प्रशासनिक अधिकारी व पुलिस मौके पर पहुंच गई। एसडीएम जोगिंद्र सिंह सिंह ने फोन पर काशीपुर के प्रधान एवं पलवल के अधिकारियों से वार्ता की।

- सीमा विवाद के स्थाई निराकरण के लिए जल्द बैठक होनी थी। संज्ञान में दिए बगैर राजस्व टीम के साथ इस तरह ग्रामीणों का काशीपुर जाकर तोड़फोड़ करना गलत है। वहां के अधिकारियों एवं किसानों से बात हुई है। बैठक कर जल्द समस्या का स्थाई निराकरण निकाला जाएगा।
विज्ञापन

- जोगिंद्र सिंह, एसडीएम खैर

42 वर्षों से नहीं सुलझ पा रहा यह सीमा विवाद
वर्ष 1975 में हुए दीक्षित अवार्ड नामक समझौते को 42 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन हरियाणा-यूपी का सीमा विवाद आज भी अनसुलझा है। यमुना में कटान के चलते आजादी के बाद से शुरू इस विवाद के स्थाई समाधान के लिए दोनों राज्यों के अधिकारियों की रजामंदी से दीक्षित अवार्ड वर्ष 1975 में घोषित किया गया था। इस अवार्ड में तय हुआ था कि यमुना में कटान के उपरांत यदि हरियाणा की जमीन यूपी की सीमा में आती है तो वह उसी हरियाणा के किसान की रहेगी और वह उस पर खेती आदि कर सकेंगे, लेकिन उस पर प्रशासनिक अधिकार यूपी का रहेगा। इसी तरह यूपी की जमीन कटान में हरियाणा में चली जाती है तो यूपी का किसान उसका स्वामी रहेगा।, लेकिन प्रशासनिक अधिकार हरियाणा का होगा। कुछ समय तक यह समझौता चला। आरोप है कि इसके बाद हरियाणा के दबंग किसानों ने यूपी की जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया। देखा देखी यूपी के किसान भी ऐसा ही करने लगे। तब से यह विवाद चला आ रहा है। इस समस्या के निस्तारण के लिए कुछ वर्ष पूर्व सीमांकन कराकर पिलर लगवाए गए थे। दोनों राज्यों के अधिकारियों की सहमति से दोनों तरफ के किसानों की भूमि का चिन्हांकन कर उन्हें राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया गया था, लेकिन विवाद कायम है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें