न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
यहां के गांव राइट का रहने वाला सद्दाम खां पुत्र विक्की खान कच्चे मकान में रहता था और टेंपो चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करता था। वह एक महीने से बुखार से जूझ रहा था। यहां गांव में बने उप स्वास्थ्य केंद्र में भी उसे उपचार नहीं मिला। एक महीने से काम पर नहीं जाने से उसके परिवार की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ गई।
इसके चलते भी उसे सही प्रकार से उपचार नहीं मिला। अगर यहां उपचार मिलता तो शायद जान बचाई जा सकती थीं। गांव में पूर्व विधायक और बसपा नेता हाजी जमीरउल्लाह भी पहुंचे और तेजी से फैल रहे संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए उपाय किए जाने की मांग की।
ग्रामीणों ने बताया कि जब से उप स्वास्थ्य केन्द्र खुला है। तब से यहां पर कोई डाक्टर ही नहीं बैठता है। पांच वर्ष पहले जब यह खुला था तो उम्मीद बंधी थी कि ग्रामीणों को सुलभता से इलाज मिल जाएगा। गांव वालों का कहना है कि अगर इस केंद्र पर उपचार की सुविधा मिल जाती तो गांव वालों को 20 किलोमीटर इलाज के लिए नहीं जाना पड़ता।
साथ ही बुधवार को जो लोग मौत का शिकार हुए हैं , उनकी भी जान बचाई जा सकती थी। इसके साथ ही गांव में जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. राहुल कुलश्रेष्ठ टीम के साथ पहुंचे। उन्होंने बताया कि बरौली विधान सभा क्षेत्र से विधायक ठा. दलवीर सिंह और पूर्व विधायक जमीरउल्लाह ने सीएमओ को गांव के संबंध में जानकारी दी। इसके बाद सीएमओ ने खैर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के दो डाक्टरों सहित 12 सदस्यीय टीम गांव में तैनात कर दी।
इसके साथ ही जिला मलेरिया विभाग की टीम भी एपीडिमियोलोजिस्ट के साथ मौके पर पहुंची। टीम ने जिन मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया उनमें अधिकांश सर्दी, जुकाम, फुंसी आदि के मरीज थे। टीम ने मुख्तार फौजी का संबंध में परीक्षण किया तो पता चला कि वह हृदय रोगी था और उसका उपचार नोएडा के कैलाश हास्पीटल में चल रहा था।
उसकी हार्ट अटैक से मौत हुई है। जैनब की मौत स्वाभाविक रू प से हुई है। सद्दाम के संबंध में जानकारी हुई कि 15 दिन से मौलवी से उसका पीलिया के संबंध में इलाज चल रहा था। उसे जेडी आयुर्वेदिक कालेज में दिखाया गया, वहीं पर उसकी मौत हुई है।
आसपास न फैले प्रकोप, रोकथाम हो: जमीरउल्लाह
पूर्व विधायक और बसपा नेता हाजी जमीरउल्लाह ने अपने समर्थकों सहित बुधवार को गांव राइट का दौरा किया। उन्होंने सीएमओ से अपील की है कि जिस तरह राइट में बुखार से और छेरत के आजाद नगर में डेंगू से तीन मौतें हुई हैं, उसको देखते हुए इस बात की सावधानी बरती जाए कि आसपास के ग्रामीण इलाकों में प्रकोप नहीं फैले। इसके लिए आसपास के गांवों में दवा का छिड़काव, रक्त की जांच, दवा वितरण आदि के कार्य में कोई शिथिलता नहीं बरती जाए। इस कार्य में स्वास्थ्य विभाग जो भी सहयोग उनसे मांगेगा, वह सहयोग देने को तैयार हैं।