न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
लगातार चार बार सांसद और शीला फोम्स लिमिटेड की संस्थापक एवं चेयरपर्सन स्व. शीला गौतम के निधन के बाद से लगातार ये कयास लगाए जा रहे थे कि अब इस परिवार का अलीगढ़ से नाता रहेगा या टूट जाएगा..? इन तमाम अटकलों पर उनके पुत्र राहुल गौतम ने सातवें दिन शनिवार को शोकसभा में पूर्ण विराम लगा दिया। शीला गौतम का निधन 88 वर्ष की उम्र में उनका निधन बीती आठ जून की रात को हो गया था।
राहुल ने कहा है कि अलीगढ़ से उनके परिवार का नाता हमेशा बना रहेगा। वह और उनके परिवार का हरेक सदस्य यहां से जुड़ा है, जुड़ा रहेगा। इसमें सभी लोगों के सहयोग की जरूरत है। राहुल शनिवार शाम जीटी रोड स्थित रॉयल रेजीडेंसी होटल में पूर्व सांसद स्व.शीला गौतम की शोकसभा में भावुक हो गए।
उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की कुछ किताबों को पढ़ने के बाद उनको अपनी मां की दो बातें समझ में आईं, जो वह पहले से ही कहा करतीं थीं। पहली बात ये कि सपने वो नहीं जो नींद में आए। सपने वो हैं जिनके लिए नींद उड़ जाए। दूसरी निर्णय लेना। समय की रेत अगर अपने कदमों की छाप छोड़नी हो तो वक्त पर फैसला लेना होगा..।
राहुल के साथ उनकी पत्नी नमिता गौतम, बेटी राजुल देवेंद्र गौतम, पुत्रवधू अवंतिका गौतम, नातिनी जाह्नवी मौजूद रहीं। सभा में एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर, मंडलायुक्त अजयदीप सिंह, सांसद सतीश गौतम, अलग अलग राजनीतिक दलों के नेता, व्यवसायी, समाजसेवी संगठनों के प्रतिनिधि, शहर के प्रबुद्धजन और भाजपा नेताओं ने पूर्व सांसद से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं।
सांसद सतीश गौतम ने कहा कि उनकी राजनीति की शुरुआत वर्ष 2004 में बुआ जी शीला गौतम के चुनाव से हुई। जब मतगणना लंबी चलती थी। उस वक्त इगलास विस क्षेत्र की मतगणना में उनको जिम्मेदारी मिली। यही सिलसिला आगे बढ़ा और वह सक्रिय राजनीति में उतर कर संसद पहुंचे।
जिलाध्यक्ष ठा. गोपाल सिंह ने एक भावपूर्ण कविता पढ़ कर उनको अपनी मां के समान बताया। शहर विधायक संजीव राजा ने शहरी विकास में उनके योगदान को उल्लेखित किया तो कोल विधायक अनिल पाराशर ने उनको अपना आदर्श बताया। खैर विधायक अनूप प्रधान ने उनको भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।
दर्जा प्राप्त मंत्री ठा. रघुराज सिंह अपने जिलाध्यक्ष कार्यकाल में शीला गौतम के कुछ वाकये सुनाए। कैसे बुखार में भी वह अपना हक जताते हुए मुनीष गौड़ और उनको दिल्ली ले गईं। वहां प्रमोद महाजन के सामने अपने टिकट के लिए संगठन की पैरवी कराई। वापसी में दूध, चाय और बिस्कुट का इंतजाम कराया, दवा भी दिलाई। पूर्व महापौर ओपी अग्रवाल और पूर्व मेयर शकुंतला भारती ने भी अपने कुछ संस्मरण पेश किए।
इस मौके पर महानगर अध्यक्ष विवेक सारस्वत, भाजयुमो जिलाध्यक्ष मुकेश लोधी, पूर्व भाजयुमो जिलाध्यक्ष यतिन दीक्षित, पूर्व महानगर भाजयुमो अध्यक्ष मनोज शर्मा, पूर्व जिलाध्यक्ष चौ. देवराज सिंह, पूर्व महानगर अध्यक्ष दीपक मित्तल, पूनम बजाज, भाजपा नेता लाल जी वर्मा, संजय पंडित, बसपा के पूर्व प्रत्याशी राजेंद्र सिंह, सपा नेता अमानउल्लाह, अल्पना अग्रवाल, रश्मि सिंह, अलीगढ़ रेलवे स्टेशन अधीक्षक डीके गौतम, अब्दुल हफीज खान सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
अलीगढ़ मंडल की ओर से श्रद्धासुमन : मंडलायुक्त
मंडलायुक्त अजयदीप सिंह ने इसी परिवार के द्वारा खुर्जा में खोले गए प्रशिक्षण केंद्र के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि दो घंटे में भी उनकी पूरी शख्सियत को पेश नहीं किया जा सकता है। मंडलायुक्त ने कहा कि वह पूरे अलीगढ़ मंडल की ओर से उनको श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं।
हारने के बाद मुझसे मांगी दावत : बिजेंद्र सिंह
कांग्रेस जिलाध्यक्ष पूर्व सांसद चौ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि तीन बार के लोकसभा चुनाव में शीला गौतम और वो आमने सामने आए। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में जब शीला जी उनसे हार गईं तो तीन दिन बाद उन्होंने खुद फोन किया और कहा कि दावत कब दोगे..? बिजेंद्र ने कहा कि शीला जी उनके दल से कांग्रेस महिला सभा की दस साल तक जिलाध्यक्ष रहीं थीं। बाद में भाजपा में शामिल हुईं। उनके पिता मोहन लाल भी यूपी कांग्रेस अध्यक्ष रहे थे। इस नाते से भी वह उनके लिए बड़ी बहन की भूमिका में रहीं। वह दलगत राजनीति से अलग ऊपर उठ कर काम करतीं थीं।
एएमयू व अलीगढ़ से था लगाव : एएमयू कुलपति
एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि वह एएमयू और वहां की शिक्षण संस्थाओं से भी लगाव रखतीं थीं। उनका अलीगढ़ से विशेष स्नेह था। जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है। पूर्व नगर विधायक एवं सपा के वरिष्ठ नेता जफर आलम ने कहा कि उनका पूरा जीवन समाजसेवा में बीता। ये एक आदर्श है। वो एक ऐसा हीरा थीं। जिसको हर तरफ से देखने पर एक उम्मीद की किरण दिखती थी।
5 किमी पैदल जाती थीं स्कूल : मधुप
इस कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए गांधी आई हास्पिटल के प्रशासनिक अधिकारी मधुप लहरी ने उनका संक्षिप्त जीवन परिचय, राजनीति से संसद तक के सफर, उद्योग जगत में शीला फोम्स उनकी सशक्त उपस्थिति से लेकर फोर्ब्स तक की सूची में पहुंचने के सफर को सारगर्भित शब्दों में रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक शिक्षा के दौर में वह पांच किमी पैदल चल कर अपने स्कूल पहुंचती थीं। बाद में भी दुनिया की अरबपति महिलाओं में अपना स्थान बनाया।